दिल्ली उच्च न्यायालय ने 8 साल के बच्चे के ग्रोथ हार्मोन इलाज पर सरकार से मांगा जवाब

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आठ साल के एक लड़के के लिए ग्रोथ हार्मोन और सोमाट्रोपिन थेरेपी तुरंत और बिना रुकावट दिए जाने की मांग पर केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार, चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) को नोटिस जारी किया है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा कर रही हैं और उन्होंने इस मामले को 25 सितंबर को निपटारे के लिए तय किया है। याचिकाकर्ता नयन मिश्रा हैं, जिनकी उम्र आठ साल और दस महीने है, और उनका प्रतिनिधित्व वकील अशोक अग्रवाल और कुमार उत्कर्ष कर रहे हैं।
नयन मिश्रा एसीएएन (ACAN) जीन म्यूटेशन से जुड़ी एक आनुवंशिक रूप से प्रमाणित विकास विकार से पीड़ित हैं, जिसकी पहचान नवंबर 2022 में मेडिकल जांच के बाद हुई थी। AIIMS में हुई जेनेटिक टेस्टिंग से एसीएएन जीन में एक संभावित रोगजनक वेरिएंट की पुष्टि हुई, जिसके बाद ग्रोथ हार्मोन और सोमाट्रोपिन थेरेपी लिखने की सलाह दी गई। 24 जून के AIIMS के अनुमान प्रमाण पत्र के मुताबिक, तीन साल की इस इलाज की अनुमानित लागत 9 लाख रुपये है।
बच्चे ने 11 अक्टूबर 2024 को चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में इलाज शुरू किया था। हालांकि, याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकारी अस्पताल में जरूरी इंजेक्शनों की लगातार उपलब्धता न होने के कारण थेरेपी में बार-बार और लंबी रुकावटें आई हैं। ये रुकावटें एक बार में तीन महीने तक चली हैं, और सबसे हालिया रुकावट 27 जुलाई को बच्चे को इंजेक्शन मिलने के बाद हुई है। इलाज में गैप से बचने के लिए बच्चे के पिता को बार-बार अपने दम पर या वैकल्पिक सरकारी माध्यमों से दवा का इंतजाम करना पड़ा है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का हवाला देते हुए, याचिका में बच्चे के जीवन, स्वास्थ्य और जरूरी मेडिकल केयर पाने के अधिकार पर जोर दिया गया है। अदालत के इस दखल का मकसद इस छोटे मरीज के लिए जीवन बदलने वाली दवा की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करना है। इस पूरी खबर की विस्तृत जानकारी के लिए आप ANI News पढ़ सकते हैं।