नितिन गडकरी के बेटे निखिल की मानहानि याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, मैगजीन को नोटिस जारी

Kittu Kumari11 August 20262 min read88 viewsNational
नितिन गडकरी के बेटे निखिल की मानहानि याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा एक्शन, मैगजीन को नोटिस जारी

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार, 10 अगस्त 2026 को The Caravan मैगजीन और उसके एडिटर-इन-chief से जवाब मांगा है। यह मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बेटे निखिल गडकरी और उनकी कंपनी सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा दायर 10 करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे से जुड़ा हुआ है। इस मुकदमे के हिस्से के रूप में दायर आवेदन में गडकरी और उनकी कंपनी को बीफ या गोमांस उत्पादों की बिक्री से जोड़ने वाले लेखों को हटाने और मैगजीन को आगे इस तरह की मानहानि वाली सामग्री प्रकाशित करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है।

* The Caravan मैगजीन और एडिटर-इन-chief को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस जारी।

* निखिल गडकरी और Cian Agro Industries ने दायर किया 10 करोड़ रुपये का Defamation Suit.

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* बीफ रिपोर्ट मामले में लेख हटाने और आगे प्रकाशन रोकने की मांग.

* मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को तय की गई।

विवाद का कारण और लीगल नोटिस

यह पूरा विवाद The Caravan द्वारा 1 मार्च 2026 को प्रकाशित एक रिपोर्ट से शुरू हुआ है, जिसका शीर्षक "Nagpur's Beef - The Beef Company Enmeshed in Gadkari's Business Empire" था। निखिल गडकरी और सियान एग्रो का कहना है कि उनकी कंपनी केवल शाकाहारी कृषि-आधारित वस्तुओं का कारोबार करती है और उसके पास बीफ या गोमांस उत्पादों के वध, प्रसंस्करण, व्यापार या निर्यात के लिए कभी कोई लाइसेंस या प्राधिकरण नहीं रहा है। plaintiffs ने दिल्ली प्रेस पात्रा प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड (प्रकाशक), The Caravan, एडिटर-इन-chief परेश नाथ और पत्रकार कौशल शराफ को 4 मार्च 2026 को एक लीगल नोटिस भेजा था, जिसे मैगजीन ने खारिज कर दिया था। वर्तमान आवेदन में विशेष रूप से विवादित सामग्री को तुरंत हटाने और विभिन्न प्लेटफार्मों पर इसके दोबारा प्रकाशन को रोकने के लिए "डाइनामिक इंजंक्शन" की मांग की गई है।

कोर्ट की प्रतिक्रिया और अगली सुनवाई

मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि कोर्ट पहले मैगजीन द्वारा प्रकाशित सामग्री और उसके स्रोतों की जांच करेगा। उन्होंने कथित वित्तीय लेनदेन के संबंध में prima facie मामला स्थापित करने और संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले किसी भी आदेश को जारी करने से पहले defendants का पक्ष सुनने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

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