MCOCA केस: नासिर गैंग के सरगना अब्दुल नासिर की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने संगठित अपराध (MCOCA) के एक मामले में फंसे अब्दुल नासिर की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। नासिर, जिसे 'नासिर गैंग' का मास्टरमाइंड माना जाता है, की जमानत याचिका को पिछले महीने विशेष MCOCA कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उसने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जस्टिस मधु जैन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और जेल अधिकारियों से आरोपी के रिकॉर्ड (नॉमिनल रोल) को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी 2027 को होगी।
निचली अदालत ने क्यों खारिज की थी जमानत?
अब्दुल नासिर को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उसने राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष MCOCA अदालत में नियमित जमानत के लिए आवेदन किया था, जिसमें उसकी मुख्य दलील यह थी कि वह 5 साल से ज्यादा समय से हिरासत में है। हालांकि, 7 सितंबर को कोर्ट ने उसकी इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि MCOCA जैसे गंभीर मामलों में केवल लंबी कैद जमानत का आधार नहीं बन सकती।
विशेष न्यायाधीश गौरव राव ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड और अपराध की प्रकृति को देखते हुए वह समाज के लिए खतरा नजर आता है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जहां एक व्यक्ति की स्वतंत्रता जरूरी है, वहीं राज्य की यह जिम्मेदारी भी है कि वह समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
कोर्ट ने नासिर की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें अन्य सह-आरोपियों को मिली जमानत का हवाला दिया गया था। अदालत ने कहा कि हर मामले के तथ्यों का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जाता है और जघन्य अपराधों में समाज के अधिकारों को आरोपी के अधिकारों से ऊपर रखा जाना चाहिए।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क था कि पुलिस किसी संगठित सिंडिकेट को साबित करने में विफल रही है और पूरा मामला केवल दस्तावेजों पर आधारित है, इसलिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की कोई संभावना नहीं है। वहीं, पुलिस ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि नासिर गैंग NCR और आसपास के राज्यों में हत्या, जबरन वसूली और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त एक खतरनाक सिंडिकेट है, जिसे खत्म करना जरूरी है।