नकली पनीर की बिक्री पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, केंद्र और FSSAI से मांगा जवाब

क्या आप होटल या रेस्टोरेंट में पनीर की डिश ऑर्डर करते समय यह जानते हैं कि वह असली दूध से बना पनीर है या कोई मिलावटी विकल्प? दिल्ली हाई कोर्ट ने इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह कार्रवाई एक जनहित याचिका (PIL) के बाद की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि बाजार में गैर-डेयरी उत्पादों को असली पनीर बताकर बेचा और परोसा जा रहा है।
अदालत में पेश याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जब कोई ग्राहक किसी होटल या रेस्टोरेंट में पनीर ऑर्डर करता है, तो वह स्वाभाविक रूप से दूध से बने उत्पाद की उम्मीद करता है। लेकिन हकीकत यह है कि ग्राहकों के पास यह जानने का कोई प्रभावी तरीका नहीं है कि उन्हें असली पनीर दिया गया है या फिर गैर-डेयरी सामग्री से बना कोई विकल्प। वकील ने कोर्ट को बताया कि ये नकली उत्पाद दिखने और स्वाद में बिल्कुल असली पनीर जैसे होते हैं, जिससे उपभोक्ता को पता ही नहीं चलता कि वह क्या खा रहा है।
खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप
जब कोर्ट ने पूछा कि इसमें किन वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो याचिकाकर्ता ने खाद्य सुरक्षा और मानक विनियमन, 2011 का हवाला दिया। याचिका में स्पष्ट कहा गया है कि यदि पनीर के नाम पर कोई ऐसा उत्पाद बेचा जा रहा है जो दूध से नहीं बना है, तो ग्राहकों को इसकी जानकारी देना अनिवार्य होना चाहिए। याचिका में असली पनीर और इन विकल्पों के पोषण मूल्य (nutritional composition) में अंतर को लेकर भी चिंता जताई गई है।
विशेष रूप से नवरात्रि और दशहरा जैसे त्योहारों के दौरान, जब खान-पान का दबाव बढ़ जाता है, याचिकाकर्ताओं ने तत्काल प्रभाव से सैंपलिंग और निरीक्षण करने की मांग की है। याचिका में किसी भी तरह के डेयरी एनालॉग उत्पादों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग नहीं की गई है, बल्कि यह मांग की गई है कि इन्हें 'असली पनीर' के रूप में पेश कर उपभोक्ताओं को गुमराह न किया जाए। कोर्ट ने अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है ताकि खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।