नदीम खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, पुलिस से पूछा- किस आधार पर की गई नजरबंदी?

Kittu Kumari12 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
नदीम खान की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, पुलिस से पूछा- किस आधार पर की गई नजरबंदी?

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्टिविस्ट मोहम्मद वासिक़ नदीम खान की एक याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। नदीम खान ने आरोप लगाया है कि 29 सितंबर को जंतर मंतर पर एक प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले पुलिसकर्मियों ने उनके ऑफिस परिसर में उनकी आवाजाही को प्रतिबंधित कर दिया था। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और इस कार्रवाई के कानूनी आधार पर सवाल उठाए हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शाहरुख आलम ने कोर्ट को बताया कि पुलिसकर्मी सुबह करीब 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक उनके परिसर में मौजूद रहे। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान पुलिस ने उन्हें कोई लिखित आदेश या नोटिस नहीं दिखाया। वकील ने सबूत के तौर पर एक तस्वीर भी पेश की, जिसमें पुलिसकर्मी परिसर में नजर आ रहे हैं। कोर्ट ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा कि पुलिस को अपना कर्तव्य निभाने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति को नजरबंद करने का क्या कारण था? कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर सकती है, लेकिन किसी की आवाजाही को रोकने का कानूनी आधार बताना होगा।

पुलिस की दलील और कोर्ट की नाराजगी

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दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के वकील ने इन आरोपों का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और पुलिस को सूचना मिली थी कि नदीम खान फिर भी वहां जा सकते हैं। पुलिस का दावा है कि उनके जवान रिसेप्शन पर उनके साथ बैठे थे और यह नजरबंदी नहीं, बल्कि केवल आवाजाही पर प्रतिबंध था। हालांकि, कोर्ट इस बात से नाराज दिखा कि याचिका की एडवांस कॉपी शनिवार को मिलने के बावजूद पुलिस स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं कर पाई।

कोर्ट ने पुलिस को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) का यह बयान भी दर्ज किया कि पुलिस अब नदीम खान को फोन नहीं करेगी।

अपनी याचिका में नदीम खान ने नई दिल्ली जिले में सभाओं और विरोध प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है कि 29 सितंबर को उनकी आवाजाही को रोकने की कार्रवाई को गैरकानूनी घोषित किया जाए और इस पूरे मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर उचित कार्रवाई की जाए।

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