कंगना रनौत के AI डीपफेक वीडियो हटाने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, मेटा को 72 घंटे का समय

दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे AI-जनित डीपफेक और आपत्तिजनक वीडियो को तुरंत हटाने का कड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति को किसी सेलिब्रिटी की पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन या भ्रामक प्रचार करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि वह अगले 72 घंटों के भीतर इन आपत्तिजनक सामग्रियों को हटा दे और उन्हें स्थायी रूप से डिलीट करे। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया यह मामला व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन का है और कंगना रनौत के व्यक्तित्व और उनकी पहचान का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए अनधिकृत उपयोग गलत है।
डिजिटल सुरक्षा और सरकार की सख्ती
कोर्ट ने केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) को भी इसमें शामिल किया है। इन विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे इंटरनेट और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं को ऐसे कंटेंट होस्ट करने वाली वेबसाइटों को 72 घंटे के भीतर ब्लॉक करने का आदेश दें।
कंगना रनौत की कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी कि इंटरनेट पर उनके नाम और आवाज का इस्तेमाल कर कई फर्जी वीडियो और विज्ञापन चलाए जा रहे हैं, जिससे उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंच रहा है। कोर्ट ने उन्हें यह छूट भी दी है कि यदि भविष्य में उन्हें कोई और मानहानि करने वाला कंटेंट मिलता है, तो वह उसे हटाने के लिए मेटा और अन्य इंटरनेट मध्यस्थों से संपर्क कर सकती हैं।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अगस्त 2026 में भारत सरकार ने आईटी नियमों में बदलाव किया था। नए नियमों के मुताबिक अब AI कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य कर दी गई है और कोर्ट या सरकार के आदेश पर गैरकानूनी कंटेंट हटाने की समय सीमा 36 घंटे से घटाकर केवल 3 घंटे कर दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 3 फरवरी, 2027 को होगी।