कंगना रनौत के AI डीपफेक हटाने का दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश, 72 घंटे का अल्टीमेटम

अभिनेता और भाजपा सांसद कंगना रनौत के व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) की रक्षा करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि इंटरनेट से उनके सभी AI-जनरेटेड डीपफेक और बिना अनुमति के बनाए गए मैनिपुलेटेड कंटेंट को अगले 72 घंटों के भीतर हटा दिया जाए। जस्टिस विकास महाजन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कंगना के नाम, आवाज और उनकी छवि के अनधिकृत इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
यह कानूनी कार्रवाई 8 अक्टूबर 2026 को शुरू की गई थी, जिसमें वरिष्ठ अधिवक्ता साकेत सिकरी ने कंगना रनौत का पक्ष रखा। कोर्ट ने माना कि एक सार्वजनिक हस्ती की पहचान का गलत इस्तेमाल कर फर्जी बयान देना न केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि समाज में गलत सूचनाएं और भ्रम भी फैलाता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंगना के पास अपने व्यक्तित्व पर मालिकाना हक है और उनकी छवि को होने वाला नुकसान वास्तविक और गंभीर है।
मेटा और सरकार को सख्त निर्देश
अदालत ने इस मामले में सोशल मीडिया दिग्गज मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक (Meta Platforms Inc.) को निर्देश दिया है कि वह 72 घंटों के भीतर सभी चिन्हित आपत्तिजनक पोस्ट और लिंक हटाए। साथ ही, मेटा को ऐसे तकनीकी उपाय करने को कहा गया है जिससे यह कंटेंट दोबारा अपलोड न हो सके। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) को आदेश दिया गया है कि वे इंटरनेट और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को उन वेबसाइटों को ब्लॉक करने का निर्देश दें, जहां यह आपत्तिजनक सामग्री होस्ट की गई है।
कंगना की कानूनी टीम ने अदालत को यह स्पष्ट किया कि यह याचिका केवल अश्लील या झूठे तरीके से बनाए गए कंटेंट को हटाने के लिए है। इसका मकसद सामान्य मीम्स या व्यंग्य (satire) पर रोक लगाना नहीं है। गौरतलब है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने इससे पहले भी ऐश्वर्या राय बच्चन, सलमान खान और अभिषेक बच्चन जैसी बड़ी हस्तियों के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए इसी तरह के आदेश दिए हैं। यह अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा।