कालिंदी कॉलेज POSH पैनल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए 90 दिन में जांच पूरी करने के आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने कालिंदी कॉलेज के पॉश जांच पैनल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की और 90 दिनों में जांच पूरी करने का आदेश दिया।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
कालिंदी कॉलेज POSH पैनल को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए 90 दिन में जांच पूरी करने के आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के कालिंदी कॉलेज की दो एसोसिएट प्रोफेसरों द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। इन प्रोफेसरों ने कॉलेज द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच के लिए गठित एक नई आंतरिक समिति (IC) के गठन को चुनौती दी थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा पक्षपात की जो आशंका जताई गई है, उसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं हैं, जिससे यह साबित हो सके कि जांच निष्पक्ष नहीं होगी।

अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि मूल शिकायत दर्ज हुए 15 महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन मामला अब तक लंबित है। इसी वजह से कोर्ट ने सख्त निर्देश दिए हैं कि इस नई जांच को फैसले की कॉपी मिलने के 90 दिनों के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।

क्या है पूरा मामला और विवाद की वजह?

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यह पूरा विवाद 7 जुलाई 2025 को शुरू हुआ था, जब दो एसोसिएट प्रोफेसरों ने कॉलेज प्रिंसिपल के पास एक संयुक्त शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि 3 जुलाई 2025 को स्टाफ एसोसिएशन की एक मीटिंग और एक व्हाट्सएप ग्रुप में उनके साथ यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं हुईं। इस शिकायत पर पहले की आंतरिक शिकायत समिति (ICC) ने 19 सितंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि यौन उत्पीड़न नहीं हुआ है।

हालांकि, दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति (VC) ने 16 जुलाई 2026 को इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया और दोबारा जांच के आदेश दिए। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को कालिंदी कॉलेज की प्रिंसिपल ने एक नई समिति का गठन किया, जिसे प्रोफेसरों ने अदालत में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यौन उत्पीड़न की जांच पूरी तरह से 'कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' (POSH Act) और यूनिवर्सिटी के XV-D अध्यादेश के अनुसार होनी चाहिए। अदालत ने यह भी साफ किया कि नियमों के मुताबिक कुलपति किसी कॉलेज की आंतरिक शिकायत के लिए यूनिवर्सिटी स्तर की अलग समिति नहीं बना सकते, क्योंकि यह तय कानूनी ढांचे का उल्लंघन होगा। यह मामला चार फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ा है, जिसे अब जल्द सुलझाने की कोशिश की जाएगी।

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