ACP विवेक भगत पर जातिवादी टिप्पणी मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से किया इनकार
दिल्ली हाई कोर्ट ने ACP विवेक भगत के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने वाली महिला पत्रकार की याचिका पर जांच रोकने से मना कर दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ चल रही जांच को रोकने से साफ इनकार कर दिया है। यह मामला एक असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल जांच जारी रहेगी और इस पर अंतिम फैसला पुलिस की प्रतिक्रिया मिलने के बाद लिया जाएगा।
यह पूरा विवाद 3 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान शुरू हुआ था। इस घटना के बाद कनॉट प्लेस सब-डिवीजन में तैनात ACP विवेक भगत ने एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में FIR दर्ज की गई। महिला पत्रकार पर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
यौन उत्पीड़न के आरोपों और कानूनी लड़ाई का टकराव
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पत्रकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने दलील दी कि यह FIR केवल उनकी मुवक्किल को डराने और चुप कराने के लिए की गई है। उन्होंने बताया कि पत्रकार नागालैंड की खासी जनजाति के लिंगदो समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। वकील ने कोर्ट को बताया कि इस FIR से पहले पत्रकार ने खुद उस पुलिस अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई थी, जिसकी जांच वर्तमान में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है।
जस्टिस मिनी पुष्करणा ने इस मामले में दिल्ली पुलिस और ACP विवेक भगत को औपचारिक नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई, जो 16 नवंबर 2026 को होगी, उससे पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पुष्करणा ने यह भी स्पष्ट किया कि कोर्ट ने अभी किसी भी प्रार्थना को खारिज नहीं किया है, बल्कि केवल यह तय किया है कि जब तक पुलिस का जवाब नहीं आता, तब तक जांच की प्रक्रिया चलती रहेगी।
इसी मामले से जुड़ी एक और याचिका 'डिजी न्यूज' के गजेंद्र सिंह ने दर्ज कराई थी, जिन्होंने अपनी FIR को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने उनके मामले में भी इसी न्यायिक आदेश के तहत कार्यवाही की है।