जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति मामला: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को तय की सुनवाई

इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) द्वारा जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले की सुनवाई अब सोमवार को की जाएगी।
यह मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने आया। सीनियर एडवोकेट संजय घोष ने याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की मांग करते हुए दलील दी कि यह याचिका दो दिन पहले ही दायर की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने जल्दबाजी के इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और पूछा, "इसमें इतनी जल्दबाजी क्या है? हम इस पर सोमवार को सुनवाई करेंगे।"
क्या है पूरा मामला और क्यों भड़की कांग्रेस?
यह याचिका इंडियन यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिव द्वारा दायर की गई है। इसमें दिल्ली पुलिस के 1 अक्टूबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें संगठन के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। IYC का आरोप है कि उन्होंने 25 सितंबर को ही पुलिस से संपर्क कर करीब 100-150 लोगों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी।
संगठन का दावा है कि वे सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार थे। याचिका में यह बात कही गई है कि बार-बार फॉलो-अप करने के बावजूद पुलिस ने अपना फैसला 1 अक्टूबर को सुनाया, जो कि प्रदर्शन की प्रस्तावित तारीख भी थी।
IYC ने अपनी दलील में कहा है कि पुलिस सार्वजनिक सभाओं को नियंत्रित कर सकती है, लेकिन बिना किसी ठोस आधार के पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगा सकती। याचिका में तर्क दिया गया है कि अनुमति न देना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत मिलने वाले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। यह याचिका एडवोकेट रूपेश सिंह भदौरिया के माध्यम से दायर की गई है।