दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख: आईसीयू हेल्पलाइन मजबूत करें और अस्पतालों में भरें खाली पद
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार को आईसीयू बेड हेल्पलाइन मजबूत करने और अस्पतालों में खाली पदों को जल्द भरने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्था और मरीजों को बेड मिलने में होने वाली दिक्कतों पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह आईसीयू बेड की जानकारी देने वाली टोल-फ्री हेल्पलाइन को और मजबूत करे और अस्पतालों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरे, ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोरा की खंडपीठ ने दिल्ली के 38 सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की निगरानी करते हुए यह आदेश जारी किए। कोर्ट ने पाया कि आईसीयू बेड के लिए समर्पित CATS टोल-फ्री नंबर 102 पर कॉल ट्रैफिक बहुत ज्यादा रहता है, जिसकी वजह से कई कॉल ड्रॉप हो जाते हैं। इसे देखते हुए कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि हेल्पलाइन की क्षमता 30 से बढ़ाकर 40 की जाए और इसके लिए 10 अतिरिक्त हेल्पडेस्क लाइनें और 24 घंटे काम करने वाला स्टाफ तैनात किया जाए। स्वास्थ्य सचिव को चार हफ्ते के भीतर इस पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
अस्पतालों में प्रशासनिक vacuum और स्टाफ की कमी पर चिंता
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि शहर के कुछ प्रमुख अस्पताल बिना किसी नियमित मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) या मेडिकल डायरेक्टर (MD) के चल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर डॉ. एन.सी. जोशी मेमोरियल अस्पताल और गुरु नानक आई सेंटर का जिक्र किया गया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि 30 नवंबर तक इन पदों पर नियुक्तियां सुनिश्चित की जाएं। साथ ही, सोसाइटी द्वारा संचालित सात अस्पतालों में डॉक्टरों द्वारा अतिरिक्त प्रभार संभालने की व्यवस्था को अक्षम बताते हुए 25 नवंबर तक पूर्णकालिक नियुक्तियां करने का आदेश दिया गया है।
स्टाफ की कमी के आंकड़े भी कोर्ट के सामने आए, जो काफी चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में 645 जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (GDMO), 406 नॉन-टीचिंग स्टाफ और 804 पैरामेडिकल स्टाफ के पद खाली पड़े हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह दो हफ्ते के भीतर UPSC को इन पदों के लिए आवेदन भेजे। विशेष बात यह है कि कोर्ट ने UPSC को निर्देश दिया है कि वह नियमित वार्षिक चक्र का इंतजार किए बिना इन भर्तियों की प्रक्रिया शुरू करे।
तत्काल राहत के लिए कोर्ट ने अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को निर्देश दिया है कि वे दिशा-निर्देशों के अनुसार रिक्त पदों पर संविदा (contractual) कर्मचारियों की नियुक्ति करें। इसके अलावा, मरीजों की सुविधा के लिए रेफरल कोऑर्डिनेटर्स की सूची उनके मोबाइल और लैंडलाइन नंबरों के साथ दिल्ली सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया गया है ताकि बेड की तलाश में भटक रहे मरीजों को सीधी मदद मिल सके।