दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त निर्देश: अस्पतालों में भरें खाली पद, ICU हेल्पलाइन लाइनों में होगी बढ़ोतरी
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने और ICU हेल्पलाइन लाइनों को बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति और मरीजों को होने वाली परेशानियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोरा की खंडपीठ ने 38 सरकारी अस्पतालों के कामकाज में सुधार लाने के लिए एक विस्तृत योजना लागू करने को कहा है। कोर्ट ने पाया कि सितंबर और अक्टूबर 2026 के आंकड़ों में हर महीने 2,000 से 2,300 कॉल आ रहे थे, जिनमें से कई कॉल ड्रॉप हो रहे थे, जिससे मरीजों को गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा था।
अदालत ने आदेश दिया है कि CATS 102 टोल-फ्री सेवा में 10 नई हेल्पडेस्क लाइनें जोड़ी जाएं, जिससे कुल लाइनों की संख्या 40 हो जाएगी। ये लाइनें 24 घंटे चालू रहनी चाहिए और इनके लिए समर्पित स्टाफ की तैनाती होगी। साथ ही, सरकार को निर्देश दिया गया है कि वह रेफरल कोऑर्डिनेटर्स की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करे ताकि मरीजों को सही जानकारी मिल सके।
अस्पतालों में रिक्त पदों को भरने और बुनियादी ढांचे पर जोर
अस्पतालों में नेतृत्व की कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने समय सीमा तय की है। सरकारी अस्पतालों के लिए 30 नवंबर 2026 तक और सात सोसाइटी द्वारा संचालित अस्पतालों के लिए 25 नवंबर 2026 तक नियमित मेडिकल सुपरिटेंडेंट और मेडिकल डायरेक्टर की नियुक्ति करना अनिवार्य है। इसके अलावा, दिल्ली सरकार को 1,855 रिक्त पदों को तेजी से भरने का निर्देश दिया गया है। इसमें 645 जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर, 406 नॉन-टीचिंग स्टाफ और 804 पैरामेडिकल स्टाफ शामिल हैं। कोर्ट ने कहा है कि भर्ती के लिए UPSC को दो सप्ताह के भीतर आवेदन भेजे जाएं या फिर दो महीने के भीतर कॉन्ट्रैक्ट पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए LNJP, GTB, DDU, जी.बी. पंत और संजय गांधी जैसे अस्पतालों को 30 नवंबर तक अपने पास मौजूद उन उपकरणों की पहचान कर रिपोर्ट देनी होगी जिनका उपयोग नहीं हो रहा है। स्वास्थ्य सचिव को यह भी सुझाव दिया गया है कि वे एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी रेडियोलॉजी सेवाओं के आउटसोर्सिंग की संभावना तलाशें, ताकि मरीजों को ये सुविधाएं मुफ्त में मिल सकें। कोर्ट ने इस पूरे मामले पर चार सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट मांगी है और अगली सुनवाई 17 दिसंबर 2026 को तय की है।