घरेलू काम की भी है आर्थिक कीमत, उम्र के आधार पर नहीं कटेगा मुआवजा: दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया है कि किसी बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र इस बात का आधार नहीं हो सकती कि उसने परिवार में आर्थिक योगदान देना बंद कर दिया है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बुजुर्ग महिलाओं द्वारा किए जाने वाले बिना वेतन के घरेलू कामों और देखभाल सेवाओं को मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजा तय करते समय जरूर मान्यता दी जानी चाहिए।
यह पूरा मामला गंगा देवी नामक महिला से जुड़ा है, जो फरवरी 2019 में एक बस दुर्घटना का शिकार हो गई थीं। इस हादसे में उनके पैर बुरी तरह कुचल गए थे, जिसके कारण उनके बाएं पैर को घुटने के नीचे से काटना पड़ा और दाएं पैर की सभी उंगलियां निकालनी पड़ीं। मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने उन्हें 14.42 लाख रुपये का मुआवजा दिया था, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 20.79 लाख रुपये कर दिया है। इसके अलावा, कोर्ट ने कृत्रिम अंग और उसके रखरखाव के लिए अलग से राशि देने का भी आदेश दिया है।
घरेलू काम को नजरअंदाज करना गलत
जस्टिस अनीश दयाल ने अपनी टिप्पणी में कहा कि मुआवजा तय करते समय रूढ़िवादी सोच या इस धारणा पर काम नहीं किया जा सकता कि कोई व्यक्ति सिर्फ उम्र बढ़ने की वजह से घर में योगदान देना बंद कर देता है। कोर्ट ने कहा कि घरेलू काम के लिए पैसे न मिलने का फायदा दुर्घटना के जिम्मेदार व्यक्ति को नहीं मिलना चाहिए और न ही इससे पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे में कटौती होनी चाहिए।
कोर्ट ने 'एजइज्म' (Ageism) यानी उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा कि 70 साल से अधिक उम्र की महिलाएं भी घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं और पोते-पोतियों की देखभाल करती हैं। भले ही इसके लिए उन्हें कोई सीधी आय न मिलती हो, लेकिन इस काम की एक निश्चित आर्थिक वैल्यू होती है। अगर परिवार ये काम घर पर न करे, तो उन्हें बाहरी मदद के लिए पैसे खर्च करने पड़ेंगे।
बता दें कि ट्रिब्यूनल ने पहले यह तर्क दिया था कि गंगा देवी 74 वर्ष की थीं और रिटायरमेंट की उम्र पार कर चुकी थीं, इसलिए उन्हें आय के नुकसान का मुआवजा नहीं दिया जा सकता। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस सोच को खारिज करते हुए उनकी मासिक आय को दिल्ली के कुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी (करीब 16,962 रुपये) के बराबर माना। कोर्ट ने साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी घरेलू काम की आर्थिक वैल्यू को मान्यता देने के लिए कोई ऊपरी आयु सीमा तय नहीं की है।