कोर्ट के आदेश की अनदेखी: दिल्ली हाई कोर्ट ने होम सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया निर्देश

Kittu Kumari17 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
कोर्ट के आदेश की अनदेखी: दिल्ली हाई कोर्ट ने होम सेक्रेटरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक गंभीर मामले में दिल्ली सरकार के गृह विभाग के सचिव (Secretary, Home) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। यह सख्त कदम कोर्ट के एक पुराने आदेश का पालन न करने और अवमानना याचिका (contempt petition) दायर होने के बाद उठाया गया है। मामला एक आजीवन कारावास के दोषी सोनू सोनकर की रिहाई (remission) रद्द करने से जुड़ा है, जिसमें प्रशासन ने कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी की।

दरअसल, जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने सुनवाई के दौरान पाया कि मई 2025 में दिए गए कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया गया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे याचिकाकर्ता के जवाब पर विचार करें और चार सप्ताह के भीतर एक तर्कसंगत आदेश पारित करें। हालांकि, अदालत ने नोट किया कि अब तक इस संबंध में कोई भी 'कम्प्लायंस एफिडेविट' (अनुपालन हलफनामा) दाखिल नहीं किया गया है। इसी लापरवाही के चलते कोर्ट ने अब होम सेक्रेटरी को खुद पेश होने को कहा है।

क्या है पूरा मामला और क्यों भड़का कोर्ट?

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यह पूरा विवाद सोनू सोनकर नाम के एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे उसकी अच्छी आचरण के आधार पर समय से पहले रिहा किया गया था। लेकिन बाद में एक हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तारी के बाद उसकी यह रिहाई (remission) रद्द कर दी गई। सोनकर ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, क्योंकि उसे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया था।

मई 2025 में जस्टिस संजीव नरूला ने स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति की आजादी को प्रशासनिक आदेशों के जरिए बिना उचित प्रक्रिया के नहीं छीना जा सकता। कोर्ट ने कहा था कि रिहाई रद्द करने का परिणाम गंभीर होता है, इसलिए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि रिहाई रद्द करने से पहले दोषी को 'कारण बताओ नोटिस' देना और उसकी बात सुनना अनिवार्य है।

कोर्ट ने पाया कि सोनकर को ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया था। इसके बाद प्रशासन को निर्देश दिया गया था कि वे पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए मामले पर पुनर्विचार करें। लेकिन जब यह देखा गया कि समय सीमा बीत जाने के बाद भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, तो हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए गृह सचिव को तलब किया है।

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