Delhi High Court: ग्रेटर कैलाश में अवैध पेड़ कटाई पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी Contempt of Court में दोषी करार

Kittu Kumari2 August 20262 min read31 viewsDelhi Local
Delhi High Court: ग्रेटर कैलाश में अवैध पेड़ कटाई पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी Contempt of Court में दोषी करार

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने वन विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को Contempt of Court का दोषी माना है।
  • यह मामला ग्रेटर कैलाश पार्ट-II क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन से जुड़ा है।
  • अदालत ने अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेशों की अवहेलना करने और ग्रेटर कैलाश पार्ट-II क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन की अनुमति देने के लिए वन विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को Contempt of Court का दोषी पाया है। जस्टिस जसमीत सिंह ने इस मामले की सुनवाई की और पूर्व Principal Chief Conservator of Forests (PCCF) सीडी सिंह और पूर्व Tree Officer (दक्षिण वन संभाग) मनदीप मित्तल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि बिना उचित सावधानी के दी गई ऐसी परमिशन से दिल्ली का ग्रीन कवर तेजी से कम हो जाएगा।

कड़े निर्देशों की अनदेखी और लापरवाही

यह Contempt action अधिकारियों द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट के 28 अप्रैल 2022 और 19 मई 2022 के पिछले आदेशों में दिए गए विशिष्ट निर्देशों का पालन करने में विफल रहने के कारण शुरू हुआ है। इन निर्देशों में पेड़ काटने या ट्रांसप्लांट करने की अनुमति देने से पहले हर पेड़ की उचित जांच, मंजूरी या अस्वीकृति के लिए विस्तृत लिखित कारण और फोटोग्राफिक सबूत होना अनिवार्य किया गया था। अदालत ने नोट किया कि फरवरी 2023 का एक Semal और एक Alstonia के पेड़ के लिए दिया गया परमिशन ऑर्डर केवल एक प्रस्तावित बिल्डिंग के एंट्रेंस के पास होने का हवाला देता है, जिसमें वैज्ञानिक या कानूनी औचित्य की कमी थी, खासकर तब जब पेड़ प्रॉपर्टी की सीमा के भीतर न होकर एक pavement पर थे। यह याचिका याचिकाकर्ता Harsh Vardhan द्वारा दायर की गई थी।

अगली सुनवाई और संभावित कार्रवाई

22 जुलाई को आए Contempt verdict के बाद, जस्टिस सिंह ने सीडी सिंह और मनदीप मित्तल दोनों को एक show cause notice जारी किया है। इसमें उन्हें चार सप्ताह के भीतर हलफनामा (affidavits) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि उन्हें Contempt of Courts Act के तहत सजा क्यों नहीं दी जानी चाहिए। कानून के तहत उन्हें छह महीने तक की कैद, एक monetary fine या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार व्यक्त करने वाली Delhi High Court इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को करेगी।

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