दिल्ली उच्च न्यायालय में सत्य निकेतन पीजी हादसे के बाद सुरक्षा और हेल्पलाइन को लेकर सुनवाई

दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है, जिसमें राजधानी के छात्र पीजी आवासों के लिए चौबीस घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट लागू करने की मांग की गई है। यह कानूनी कदम 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन के संपत्ति संख्या 14 पर हुए एक भीषण इमारत हादसे के बाद उठाया गया है। इस हादसे में पांच छात्रों सहित सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इस याचिका के संबंध में विस्तृत जानकारी एएनआई न्यूज पर उपलब्ध है। याचिका में इमारत की संरचनात्मक मजबूती को लेकर चिंता जताई गई है और कहा गया है कि इस इमारत के पास नगर निगम यानी एमसीडी द्वारा स्वीकृत कोई नक्शा नहीं था।
अदालत में सुनवाई और गिरफ्तारियां
25 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने अधिकारियों से मिले अपडेट की समीक्षा की। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनके नाम उर्मिला गुप्ता, हरि राम गुप्ता, महेश गुप्ता, शुभम त्यागी, सुधांशू लोवेनिश कुमार और ठेकेदार मनोज हैं। जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने संरचनात्मक मरम्मत के लिए किसी विशेषज्ञ की सलाह नहीं ली, बल्कि अयोग्य लोगों से काम करवाया जिससे इमारत कमजोर हो गई थी। इसके अलावा, पीजीडीएवी कॉलेज के छात्र शिवांश कालिया द्वारा 26 सितंबर 2026 को एक और नई जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें विश्वविद्यालय और कोचिंग हब स्तर पर छात्र आवास सलाहकार और निगरानी समितियां बनाने की मांग की गई है।
प्रशासनिक कार्रवाई और तोड़फोड़ अभियान
इस त्रासदी के बाद अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई है। दिल्ली सरकार ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है जो एक नियम कायदों का ढांचा तैयार करेगी और इस हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए हैं। एमसीडी ने बताया कि उसके 12 जोन में 2,453 पीजी इमारतों का सर्वे किया गया, जिनमें से 1,723 संपत्तियों के पास कोई स्वीकृत नक्शा नहीं मिला। 6 सितंबर से 23 सितंबर 2026 के बीच चलाए गए अभियानों में 543 संपत्तियों को गिरा दिया गया, 178 इमारतों को सील कर दिया गया और 354 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। एक उपायुक्त सहित पांच एमसीडी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। छात्र हॉस्टल की उपलब्धता को लेकर दिए गए अस्पष्ट जवाब के लिए उच्च न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय की आलोचना की है और इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है, जिसकी पूरी रिपोर्ट एएनआई न्यूज पर देखी जा सकती है।