टेरिटोरियल आर्मी भर्ती में महिलाओं के लिए कम पदों पर दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को होगी सुनवाई

दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई तय की गई है। इस याचिका में टेरिटोरियल आर्मी में पुरुष और महिला उम्मीदवारों की भर्ती में भेदभाव का आरोप लगाया गया है। याचिका के अनुसार, साल 2022 से प्रत्येक भर्ती प्रक्रिया में पुरुषों के लिए बहुत अधिक पद दिए गए हैं, जबकि महिला उम्मीदवारों के लिए केवल एक पद सीमित रखा गया है। यह याचिका राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता और लेखक कुश कालरा द्वारा ANI के इनपुट के आधार पर दायर की गई है। याचिका में इस भर्ती पैटर्न को असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेदों का उल्लंघन बताया गया है।
भर्ती में पदों का विवरण और पुरानी याचिका का हवाला
पिटिशन के मुताबिक, टेरिटोरियल आर्मी ने साल 2022 में पुरुषों के लिए 12 और महिलाओं के लिए एक पद दिया था, जबकि 2023 और 2025 में 18 पुरुषों के खिलाफ एक महिला का पद दिया गया। इसके अलावा साल 2026 में 11 पदों के मुकाबले महिलाओं के लिए एक पद रखा गया और पुरुष-महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाई गईं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह भर्ती पैटर्न दिल्ली हाईकोर्ट के जनवरी 2018 के कुश बनाम भारत संघ फैसले के उद्देश्य को विफल करता है। उस फैसले में कहा गया था कि केवल लिंग के आधार पर महिलाओं को टेरिटोरियल आर्मी अधिकारी भर्ती से बाहर नहीं किया जा सकता है और कानून के तहत 'कोई भी व्यक्ति' शब्द में पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं।
साइबर टास्क भर्ती और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र
याचिका में साल 2015 से चले आ रहे विवाद का जिक्र किया गया है, जिसके बाद 2018 का फैसला आया था। हालांकि इसके बाद महिलाओं को शामिल करने की अनुमति दी गई, लेकिन पदों का आवंटन अभी भी पुरुषों के पक्ष में ज्यादा है। पिटिशन में महिलाओं के लिए एक सीट के आवंटन को 'टोकनिज्म' बताया गया है जो समान अवसर नहीं देता है। याचिका में साल 2024 की साइबर टास्क भर्ती अधिसूचना का भी हवाला दिया गया है जिसमें बिना किसी लिंग विभाजन के 'नागरिक उम्मीदवार (पुरुष/महिला)' के लिए चार पद विज्ञापित किए गए थे। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के फैसले और बबीता पुनिया मामले का भी हवाला दिया गया है।
याचिकाकर्ता की मांग और हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2025 के फैसले के बाद याचिकाकर्ता ने रक्षा मंत्रालय के सचिव को 13 अगस्त 2025 को एक अभ्यावेदन भेजा था जिसमें सुधारात्मक उपायों की मांग की गई थी। याचिका के अनुसार, इसके बाद भी कोई उपचारात्मक कार्रवाई की सूचना नहीं दी गई और 2026 की भर्ती में भी एक बार फिर महिलाओं के लिए एक पद और पुरुषों के लिए 11 पद दिए गए। इस अधिसूचना के तहत प्रवेश परीक्षा 12 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी। याचिकाकर्ता ने लिंग आधारित भेदभावपूर्ण भर्ती प्रथा को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। साथ ही अधिकारियों को टेरिटोरियल आर्मी अधिकारी भर्ती के लिए एक सामान्य मेरिट सूची सहित निष्पक्ष और लिंग-तटस्थ भर्ती प्रक्रिया अपनाने के निर्देश देने की मांग की गई है। मामले की सुनवाई कल दिल्ली हाईकोर्ट में होनी है।