दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: टेरा इन्वेस्ट के संस्थापकों को मानहानि मामलों में मिली अंतरिम राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने अलग-अलग मानहानि मुकदमوں में टेरा इन्वेस्ट के संस्थापक अंकिता उदय बोस और कृष्ण रतन को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कृष्ण रतन मामले में सुनवाई करते हुए प्रतिवादियों को वादी के खिलाफ मानहानि वाले लेख प्रकाशित करने से रोक दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिवादी आरोपों को लेकर तथ्य तलाशने का काम जारी रख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए Delhi High Court पर जा सकते हैं।
अंकिता बोस के मामले में भी आदेश
एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने 24 अगस्त 2026 को अंकिता बोस के मुकदमे में आदेश जारी किया। कोर्ट ने प्रतिवादियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे लिंक्डइन पर विशिष्ट लेख प्रसारित करने से रोक दिया है। इसके अलावा ऐसा कोई भी कंटेंट प्रकाशित करने से मना किया गया है जो वादी के कानूनी अधिकारों को प्रभावित कर सके। इस संबंध में मूल खबर ANI News पर उपलब्ध है।
संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला
दोनों न्यायाधीशों ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिष्ठा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का एक अनिवार्य हिस्सा है। अदालत ने रेखांकित किया कि मीडिया संस्थानों को चल रही जांच के संबंध में सावधानी बरतनी चाहिए और न्यायिक निर्णय से पहले आपराधिक दायित्व नहीं थोपना चाहिए। कृष्ण रतन के मामले में आगे की कार्यवाही के लिए 13 अक्टूबर 2026 और 29 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है।