दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, गैंगस्टर नीरज बवानिया को पत्नी और बच्चों से मिलने के लिए 6 घंटे की कस्टडी पैरोल मिली

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को गैंगस्टर नीरज बवानिया उर्फ नीरज सहरावत को अपनी पत्नी और नवजात बच्चों से मिलने के लिए 6 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर कर ली है। कोर्ट ने सुरक्षा कारणों और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए उसकी अंतरिम जमानत की अर्जी को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने आदेश दिया कि नीरज बवानिया को गुरुवार को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच पुलिस कस्टडी में मोती नगर स्थित अस्पताल और उसके घर ले जाया जाए। बवानिया इस समय न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) रुपाली बंदोपाध्याय ने अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि बवानिया एक गिरोह का सरगना है और अन्य गैंग उसकी जान के पीछे पड़े हैं, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि उसे जमानत मिलने से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। दूसरी ओर, वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील दलाल ने तर्क दिया कि बवानिया पिछले 11 साल से हिरासत में है और अन्य मामलों में जमानत पर है। उन्होंने यह भी कहा कि कस्टडी पैरोल में सुरक्षा के लिए 57 पुलिसकर्मी लगेंगे, जबकि अंतरिम जमानत मिलने पर केवल दो पुलिसकर्मियों की जरूरत होगी।
अदालत को यह भी बताया गया कि नीरज की पत्नी की 14 अगस्त को आपातकालीन सर्जरी हुई थी, जिसमें उन्होंने 27 सप्ताह के गर्भ में ट्रिपलेट्स (तीन बच्चों) को जन्म दिया था। इनमें से एक बच्चे की जन्म के कुछ ही घंटों बाद मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य बच्चे मोती नगर के एक अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती हैं। एक बच्चा वेंटिलेटर पर है और दूसरा सीपीएपी सपोर्ट पर है, जबकि पत्नी को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने भी बवानिया के हाई-रिस्क कैदी होने और गैंगवार के जोखिम के कारण उसे अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने स्थिति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केवल 6 घंटे की सीमित कस्टडी पैरोल की अनुमति दी है ताकि वह अपने अस्पताल में भर्ती बच्चों और पत्नी से मिल सके।