दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कथित नागा विद्रोही मसासासोंग एओ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत दे दी है। वह तीन साल से अधिक समय से हिरासत में थे। जस्टिस संजीव नरूला ने 50,000 रुपये के मुचलके और एक जमानत बांड पर मसासासोंग एओ को जमानत दी है। अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा कि विस्तृत आदेश बाद में अपलोड किया जाएगा। उनका पिछला जमानत आवेदन ट्रायल कोर्ट द्वारा 16 मार्च 2026 को खारिज कर दिया गया था। वह नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) और एनफोर्समेंट डायरेक्टर (ED) द्वारा दर्ज मामलों में आरोपी हैं।
9 जुलाई को हाईकोर्ट ने ईडी को नोटिस जारी कर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी और जेल अधिकारियों से नॉमिनल रोल भी तलब किया था। मसासासोंग की ओर से पेश वकील शुभी श्रीवास्तव ने दलील दी कि उन्होंने साढ़े तीन साल की हिरासत काट ली है, जो मनी लॉन्ड्रिंग अपराधों के लिए निर्धारित अधिकतम सजा का आधा है। जमानत याचिका में कहा गया था कि मसासासोंग 2022 से हिरासत में हैं। यह भी तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट ने इसी आधार पर एक अन्य आरोपी आलेमला जामिर को जमानत दे दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि एक अन्य आरोपी को कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उसे बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट किया गया था। याचिकाकर्ता ने आगे बताया कि मसासासोंग एओ 49 वर्ष के हैं और उनके 90 वर्ष के बुजुर्ग माता-पिता नागालैंड के एक छोटे से गांव में रहते हैं जो उनसे मिलने दिल्ली नहीं आ सकते हैं।
आलेमला जामिर के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत 17 दिसंबर 2019 को एक एफआईआर दर्ज की गई थी। 20 दिसंबर 2019 को एनआईए ने मामला अपने हाथ में लिया और फिर से एफआईआर दर्ज की। जांच के दौरान मसासासोंग एओ को गिरफ्तार किया गया था और वह वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। इसके बाद 2021 में ईडी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्हें 2022 में गिरफ्तार किया गया था।