दिल्ली हाईकोर्ट ने ISIS साजिश मामले के आरोपी फरहान अंसार सुसे को सर्जरी के लिए दी 30 दिन की कस्टडी जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने ISIS साजिश मामले के आरोपी फरहान अंसार सुसे को सर्जरी और इलाज के लिए 30 दिन की कस्टडी जमानत दे दी है। यह आदेश 18 सितंबर 2026 को जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच ने दिया। सुसे अम्बिलिकल हर्निया, ब्रोंकियल अस्थमा और टाइप-II डायबिटीज से पीड़ित हैं। अदालत ने उन्हें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के भीतर अपनी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है। अदालत ने मुंबई में इलाज कराने के उनके अनुरोध को खारिज कर दिया, जिसका कारण महाराष्ट्र के पडघा और आसपास के क्षेत्रों में उनके कथित नेटवर्क का हवाला देना था। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी बीमार आरोपी को अपने खर्चे पर इलाज के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है। राहत देते हुए बेंच ने सुसे पर अन्य व्यक्तियों के साथ संचार और संपर्क को लेकर विशेष शर्तें लगाई हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली अपील और माफी की याचिका सहित अन्य लंबित मामलों को प्रभावित नहीं करेंगी। इस मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की वकील अस्मिता सिंह और सुसे के वकील साइपान दस्तगीर शेख ने पक्षों का प्रतिनिधित्व किया। NIA ने सुसे पर आईपीसी की धाराओं 120बी और 387 के साथ-साथ यूएपीए (UAPA) की धाराओं 13, 18, 18ए, 20, 38 और 39 के तहत आरोप लगाए हैं। मार्च 2024 और जून 2024 में चार्जशीट दाखिल की गई थीं। एजेंसी का आरोप है कि सुसे ने दिवंगत आरोपी साकिब नाचन के साथ मिलकर भारत में ISIS की गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रची थी। इसमें फंडिंग के लिए जबरन वसूली नेटवर्क स्थापित करना, ISIS का प्रचार करना और संगठन के प्रति निष्ठा की शपथ लेना शामिल है। सुसे लगभग दो साल और नौ महीने से हिरासत में हैं और इन आरोपों का विरोध कर रहे हैं। उनके वकील का तर्क है कि पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत में आरोप तय करने पर बहस जारी है और आईएसआईएस से उनका संबंध अभी स्थापित नहीं हुआ है।