दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: स्त्रीधन की रिकवरी के लिए कस्टोडियल इंटेरोगेशन जरूरी नहीं, 80 साल के बुजुर्ग को अग्रिम जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने 80 साल के बुजुर्ग को दी अग्रिम जमानत
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल स्त्रीधन की रिकवरी के लिए कस्टोडियल इंटेरोगेशन यानी हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं होती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की रिकवरी बेल कोर्ट के दायरे में नहीं आती है। यह आदेश न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया ने करीब 80 साल के एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। आरोपी पर आईपीसी की धारा 354, 354A, 376, 498A, 406, 34 और बीएनएस की धारा 74 के तहत आरोप लगाए गए थे। मूल खबर विस्तार से ANI पर उपलब्ध है।
जांच अधिकारी के नोटिस पर कोर्ट ने उठाए सवाल
अदालत ने जांच अधिकारी के उस दावे पर भी सवाल खड़े किए जिसमें कहा गया था कि बुजुर्ग आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ था। कोर्ट ने पाया कि कथित नोटिस मौखिक रूप से जारी किए गए थे और इस संबंध में कोई केस डायरी पेश नहीं की गई। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी की यह कार्रवाई भरोसे के काबिल नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि जांच अधिकारी ने आरोपी को जांच में शामिल होने के लिए वास्तव में कहा ही नहीं था।
यौन उत्पीड़न के आरोप और देरी पर टिप्पणी
प्राथमिकी (FIR) मूल रूप से 29 अप्रैल 2026 को दर्ज की गई थी, जिसमें बाद में यौन उत्पीड़न से जुड़ी धाराएं जोड़ी गईं। शिकायतकर्ता ने अपने ससुर यानी आरोपी पर कई बार यौन उत्पीड़न करने और मारपीट के आरोप लगाए थे। अदालत ने गौर किया कि कथित घटनाएं मई 2022 या उससे पहले की थीं, जबकि एफआईआर बहुत बाद में दर्ज की गई और इसमें कोई निश्चित तारीख भी नहीं बताई गई थी। अदालत ने कहा कि इतनी लंबी चुप्पी को सही ठहराने के लिए कोई ठोस परिस्थितियां नजर नहीं आती हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि हिरासत में पूछताछ अधिक प्रभावी होगी। हालांकि, हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अर्णेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले के फैसले का हवाला दिया और कहा कि पारिवारिक मामलों में गिरफ्तारी स्वतः या नियमित रूप से नहीं होनी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी की उम्र करीब 80 वर्ष है और केवल इस आधार पर उसे हिरासत में नहीं रखा जा सकता कि परिवार के अन्य सदस्य कनाडा में हैं। अंततः अदालत ने 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर अग्रिम जमानत मंजूर कर ली।