दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी अस्पतालों की बदहाली सुधारने के लिए जारी किए निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे, स्टाफ की कमी और मेडिकल उपकरणों के प्रबंधन में सुधार के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

राजधानी दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्वास्थ्य ढांचे में सुधार और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं को दुरुस्त करने के लिए सरकार और संबंधित अस्पतालों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोरा की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अदालत ने पांच प्रमुख चिकित्सा संस्थानों—लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल, गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल और संजय गांधी अस्पताल को आदेश दिया है कि वे अपने यहां मौजूद सभी उन मेडिकल उपकरणों की पूरी सूची तैयार करें जो फिलहाल काम नहीं कर रहे हैं या जिनका उपयोग नहीं हो रहा है। यह रिपोर्ट 30 नवंबर, 2026 तक दिल्ली सरकार को सौंपी जानी है।
स्टाफ की कमी और भर्ती प्रक्रिया पर जोर
अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए कोर्ट ने सख्त समयसीमा तय की है। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के डीन और संबंधित बोर्डों को विशिष्ट श्रेणियों में संविदात्मक (कॉन्ट्रैक्ट) रिक्तियों को भरने के लिए दो महीने का समय दिया गया है। साथ ही, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) को पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की वर्तमान स्थिति पर अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
सिस्टम में सुधार लाने के लिए 16 नवंबर, 2026 को सभी 38 सरकारी अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और निदेशकों की एक बैठक होगी। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्टाफ की उपलब्धता और उपकरणों के रखरखाव के लिए एक साझा रणनीति तैयार करना होगा।
इसके अलावा, कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को निजी केंद्रों पर एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसे डायग्नोस्टिक टेस्ट आउटसोर्स करने पर होने वाले खर्च का विश्लेषण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह सुझाव दिया है कि क्या संविदा radiologists के वेतन में वृद्धि करना निजी केंद्रों को भुगतान करने से बेहतर और टिकाऊ विकल्प हो सकता है।
मरीजों की सुविधा के लिए कोर्ट ने आदेश दिया है कि 'रेफरल कोऑर्डिनेटर्स' की सूची और उनके संपर्क विवरण दिल्ली सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाएं, ताकि मरीजों को सही मार्गदर्शन मिल सके। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर, 2026 को होगी।