नकली पनीर की बिक्री पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, FSSAI और केंद्र सरकार को नोटिस

क्या आप भी रेस्टोरेंट या होटल में पनीर की डिशेज बड़े चाव से खाते हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने बाजार में बिकने वाले 'नॉन-डेयरी पनीर एनालॉग' यानी नकली पनीर के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस मामले में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
यह पूरी कानूनी लड़ाई रिधिमा सिंह और अवलोकितेश्वर पद्मपाणि सिद्धार्थ द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पनीर एक स्टैंडर्ड डेयरी उत्पाद है, लेकिन बाजार में ऐसे विकल्प बेचे जा रहे हैं जो दूध से नहीं बने हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि असली पनीर प्रोटीन से भरपूर होता है, जबकि ये नकली विकल्प मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट पर आधारित होते हैं, जिससे ग्राहकों को सही पोषण नहीं मिल पाता।
ग्राहकों की पहचान के सामने बड़ी चुनौती
याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया है कि जब कोई ग्राहक होटल या रेस्टोरेंट में पनीर ऑर्डर करता है, तो उसके पास यह जानने का कोई तरीका नहीं होता कि उसे असली डेयरी पनीर परोसा जा रहा है या कोई सिंथेटिक विकल्प। याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि त्योहारों के सीजन (नवरात्रि और दशहरा) को देखते हुए तुरंत सैंपलिंग और टेस्टिंग की जाए, हालांकि कोर्ट ने इस स्तर पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है।
बता दें कि गुजरात, पंजाब, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहले ही नकली पनीर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा चुकी है। दिल्ली खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी अगस्त 2026 में ऐसी कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में नॉन-डेयरी उत्पादों को नष्ट किया था।
दूसरी ओर, FSSAI ने सितंबर 2026 में एक ड्राफ्ट संशोधन जारी किया था, जिसमें यह प्रस्ताव है कि जो उत्पाद दूध से नहीं बने हैं, उनके लिए 'पनीर' शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया जाए। FSSAI ने पहले ही स्पष्ट किया था कि एनालॉग उत्पादों की बिक्री सही लेबलिंग के साथ की जा सकती है, लेकिन उन्हें 'पनीर' कहना खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2006 का उल्लंघन है। अब कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को अपना औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया है।