EWS छात्रों को यूनिफॉर्म के बजाय कैश देना गलत नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
दिल्ली हाई कोर्ट ने EWS छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म की जगह नकद सहायता देने के सरकार के फैसले को सही ठहराया और रिव्यू पिटीशन खारिज की।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दिल्ली सरकार के उस निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी है, जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूह के छात्रों को स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के बजाय नकद सहायता (Cash Assistance) देने की बात कही गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार का यह फैसला किसी भी तरह से मनमाना या तर्कहीन नहीं है।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 'जस्टिस फॉर ऑल' नामक संस्था ने इस नीति को चुनौती देते हुए एक रिव्यू पिटीशन दायर की थी। संस्था का तर्क था कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत मुफ्त किताबें और यूनिफॉर्म देना अनिवार्य है, और नकद राशि देना इस कानून की मूल भावना के खिलाफ है। हालांकि, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस रेनू भटनागर की बेंच ने इस याचिका को खारिज कर दिया।
सरकारी नीति के पीछे की वजह
अदालत ने सरकार के उस तर्क को स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि यूनिफॉर्म की खरीद और वितरण की प्रक्रिया काफी जटिल है। सरकार के मुताबिक, अलग-अलग स्कूलों में यूनिफॉर्म के डिजाइन, रंग और स्पेसिफिकेशन अलग-अलग होते हैं। इसके अलावा, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के जरिए टेंडर प्रक्रिया में करीब छह महीने का समय लग जाता है, जिससे शिक्षा विभाग और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। ऐसे में छात्रों को सीधे पैसे देना अधिक व्यावहारिक है ताकि वे अपनी जरूरत के हिसाब से यूनिफॉर्म खरीद सकें।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अदालतें आमतौर पर सरकार के नीतिगत फैसलों में तब तक हस्तक्षेप नहीं करतीं, जब तक कि वे फैसले पूरी तरह से मनमाने न हों या समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाले न हों। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि रिव्यू पिटीशन का इस्तेमाल अपील के विकल्प के तौर पर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पाया कि पिछले फैसले में किसी भी महत्वपूर्ण तथ्य की अनदेखी नहीं की गई थी और न ही कोई स्पष्ट त्रुटि थी।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने 10 जून 2025 को यह नीति लागू की थी। इससे पहले कोर्ट ने अप्रैल 2023 में मुफ्त यूनिफॉर्म देने का निर्देश दिया था, लेकिन बाद में जनवरी में सरकार की व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए इस आदेश में बदलाव कर दिया गया था। अब कोर्ट के इस ताजा फैसले के बाद सरकार की नकद सहायता वाली नीति बरकरार रहेगी।