EWS एडमिशन पर दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 5 किमी के दायरे में मिलेगा स्कूल

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत एडमिशन लेने वाले बच्चों के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद राहत भरा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए बच्चों को उनके घर के नजदीक ही स्कूल मिलना चाहिए। इस मामले में कोर्ट ने शिक्षा निदेशालय (DoE) और संबंधित स्कूल को निर्देश दिया है कि वे छात्र के एडमिशन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें।
यह पूरा मामला 7 साल के बच्चे विराज सोलंकी के एडमिशन से जुड़ा है। बच्चे के पिता गौरव कुमार सोलंकी ने पहली कक्षा में एडमिशन के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस जसमीत सिंह की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए बच्चे का दाखिला सुनिश्चित किया जाए।
घर से 5 किलोमीटर के दायरे में मिलेगा विकल्प
कोर्ट ने इस आदेश में एक महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा है। अदालत ने कहा कि अगर पहले से आवंटित स्कूल में किसी कारणवश एडमिशन नहीं मिल पाता है, तो शिक्षा निदेशालय की यह जिम्मेदारी होगी कि वह बच्चे के घर से 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान में सीट उपलब्ध कराए।
अक्सर दिल्ली के स्कूलों में EWS कोटे के तहत एडमिशन के दौरान अभिभावकों को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कोर्ट का यह फैसला न केवल विराज सोलंकी के लिए मददगार साबित होगा, बल्कि उन तमाम अभिभावकों के लिए भी एक मिसाल बनेगा जो अपने बच्चों के लिए घर के पास बेहतर शिक्षा की तलाश में हैं। इस आदेश के जरिए कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि शिक्षा के अधिकार का मतलब केवल एडमिशन देना नहीं, बल्कि उसे सुलभ बनाना भी है।