सौरव गांगुली के अधिकारों का उल्लंघन: फिल्म 'दूसरा' के मेकर्स को दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म 'दूसरा' के निर्माताओं को सौरव गांगुली के अधिकारों के उल्लंघन पर 2 करोड़ की बैंक गारंटी देने और डिस्क्लेमर लगाने का आदेश दिया।

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की शख्सियत और उनके करियर से जुड़ी यादों का इस्तेमाल बिना अनुमति के करना फिल्म निर्माताओं को महंगा पड़ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म 'दूसरा' के निर्माताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे गांगुली के पर्सनालिटी और पब्लिसिटी अधिकारों का उल्लंघन माना है। कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को निर्देश दिया है कि वे फिल्म में एक स्पष्ट डिस्क्लेमर लगाएं और 2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करें।
जस्टिस तेजस कारिया ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि फिल्म की कहानी और गांगुली के क्रिकेट करियर की घटनाएं इतनी गहराई से जुड़ी हुई हैं कि इस स्तर पर उन्हें फिल्म से पूरी तरह हटाना संभव नहीं है। इसी वजह से कोर्ट ने रमेश देव प्रोडक्शंस प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है कि वे फिल्म की शुरुआत और अंत में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक डिस्क्लेमर जोड़ें। इस डिस्क्लेमर में साफ तौर पर लिखा होना चाहिए कि सौरव गांगुली ने फिल्म में अपनी छवि के इस्तेमाल की सहमति नहीं दी है और फिल्म का उद्देश्य उनके अधिकारों का उल्लंघन करना नहीं है।
2 करोड़ की गारंटी और सख्त शर्तें
कोर्ट ने केवल डिस्क्लेमर तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि सुरक्षा के तौर पर निर्माताओं को दो हफ्ते के भीतर हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास 2 करोड़ रुपये की बिना शर्त बैंक गारंटी जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि इन शर्तों का पालन नहीं किया गया, तो फिल्म के व्यावसायिक प्रदर्शन या इसके किसी भी हिस्से के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाएगी।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सौरव गांगुली और लव फिल्म्स एलएलपी ने एक याचिका दायर की। लव फिल्म्स के पास गांगुली की आधिकारिक बायोपिक 'दादा – द सौरव गांगुली स्टोरी' बनाने के अधिकार हैं, जो 2027 में रिलीज होनी है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म 'दूसरा' ने गांगुली की अनुमति के बिना उनके जीवन की प्रतिष्ठित घटनाओं का व्यावसायिक इस्तेमाल किया है।
विशेष रूप से, 2002 की नेटवेस्ट सीरीज फाइनल की जीत और लॉर्ड्स की बालकनी पर गांगुली द्वारा शर्ट उतारकर जश्न मनाने वाले ऐतिहासिक पल को फिल्म में बिना अनुमति के दिखाया गया था। वादियों का तर्क था कि इस तरह के दृश्यों से दर्शकों को यह लग सकता है कि गांगुली इस फिल्म से जुड़े हैं या उन्होंने इसे समर्थन दिया है, जबकि असल में ऐसा नहीं था।