दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को पूर्व जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर कथित तौर पर नकदी मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) या सीबीआई जांच कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमित बंसल ने याचिकाकर्ता के अधिकार पर सवाल उठाया और इस कानूनी कार्रवाई को 'जंगली विच हंट' करार दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को निचली अदालत से संपर्क करने जैसे अन्य विकल्प तलाशने का सुझाव दिया। अदालत के रुख के बाद याचिकाकर्ता, वकील घनश्याम उपाध्याय ने अन्य कानूनी विकल्प तलाशने के लिए अपनी याचिका वापस ले ली। इस खबर की विस्तृत जानकारी ANI News पर उपलब्ध है।
यह मामला 14 मार्च 2025 को लगभग रात 11:35 बजे का है, जब लुटियंस दिल्ली में न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लग गई थी।
उस समय रिपोर्ट्स में भारी मात्रा में नकदी मिलने का दावा किया गया था, जिसके बाद एक संसदीय जांच शुरू की गई थी। लोकसभा द्वारा गठित एक समिति ने बाद में रिपोर्ट दी कि वर्मा के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। समिति ने 500 रुपये के नोटों के अस्पष्ट बंडलों की उपस्थिति का हवाला दिया, जिन्हें न तो ठीक से सुरक्षित रखा गया था और न ही संरक्षित किया गया था और जो बाद में गायब हो गए। घटना के समय दिल्ली हाई कोर्ट के जज के रूप में सेवा दे रहे वर्मा को बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था।
यशवंत वर्मा ने महाभियोग की कार्यवाही का सामना करते हुए 9 अप्रैल 2026 को इस्तीफा दे दिया था, जिसे बाद में लोकसभा ने निष्फल कर दिया था।
यह वर्तमान याचिका उपाध्याय द्वारा दायर एक समान अनुरोध के बाद आई है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में खारिज कर दिया था। उस दौरान शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की थी कि यह याचिका 'सस्ती लोकप्रियता' के लिए दायर की गई प्रतीत होती है।