Delhi High Court ने संसद सुरक्षा समीक्षा की PIL खारिज, कहा- यह कार्यपालिका और विधायिका का काम है

बुधवार, 5 अगस्त 2026 को Delhi High Court ने संसद भवन की सुरक्षा और संरक्षा की व्यवस्था की समीक्षा की मांग करने वाली एक Public Interest Litigation (PIL) को खारिज कर दिया है। Chief Justice DK Upadhyaya और Justice Tejas Karia की division bench ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामले पूरी तरह से कार्यपालिका (Executive) और विधायिका (Legislature) के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए अदालत संसद के प्रशासनिक या संचालन मामलों में कोई निर्देश जारी नहीं कर सकती है। ANI की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने इस PIL को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे विषय अदालत की रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) से बाहर हैं।
अदालत ने PIL पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान Chief Justice Upadhyaya ने PIL की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी की कि क्या आपको लगता है कि संसद अपनी सुरक्षा करने में असमर्थ है? अदालत ने बिना किसी असाधारण परिस्थिति के केवल पब्लिसिटी के लिए दायर की जाने वाली याचिकाओं पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने यह भी साफ किया कि High Court संसद को उसकी सुरक्षा व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करने का निर्देश नहीं दे सकती है, क्योंकि यह कार्यपालिका और संसद का आंतरिक विषय है।
व्यक्तिगत विधायी प्रस्ताव पर विचार करने से इनकार
अदालत ने याचिकाकर्ता की उस मांग को भी ठुकरा दिया जिसमें उसने अपने द्वारा तैयार किए गए एक 'कांसेप्ट नोट' की जांच करने का निर्देश देने की मांग की थी। याचिकाकर्ता ने इस नोट का शीर्षक 'Proposed Outline of the Parliament of India (Security, Sanctity and Protection) Act, 2026' रखा था। Court ने स्पष्ट किया कि वह सरकार को किसी व्यक्ति के विधायी प्रस्ताव का मूल्यांकन करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती है। अदालत के इस फैसले से यह दोहराया गया कि संसद की सुरक्षा से जुड़े फैसले नीति, प्रशासन और सुरक्षा आकलन से संबंधित हैं, जिन्हें मुख्य रूप से Union Government और Parliament (लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय सहित) द्वारा संभाला जाता है।