संसद की सुरक्षा समीक्षा की मांग वाली PIL खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- यह सरकार और संसद का काम

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को भारतीय संसद की सुरक्षा और संरक्षा से जुड़े संस्थागत ढांचे की व्यापक समीक्षा की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की कि ऐसे मामले पूरी तरह से सरकार और संसद के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस मामले की विस्तृत जानकारी के लिए आप ANI News की रिपोर्ट देख सकते हैं।
* दिल्ली हाईकोर्ट ने संसद सुरक्षा समीक्षा की PIL खारिज की।
* अदालत ने कहा कि ऐसे मामले सरकार और संसद के दायरे में आते हैं।
* याचिकाकर्ता ने 28 जुलाई 2026 को यह PIL दायर की थी।
अदालत की टिप्पणी और अधिकार क्षेत्र
मुख्य न्यायाधीश उपाध्याय ने न्यायिक हस्तक्षेप के औचित्य पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा निर्देश कैसे जारी किया जा सकता है, क्योंकि समय-समय पर इसकी समीक्षा करना संसद का काम है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि अदालत के पास संसद को समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा करने का आदेश देने का अधिकार नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि वह सरकार को किसी व्यक्ति के प्रस्ताव का आकलन करने का आदेश नहीं दे सकती है। अदालत ने सुझाव दिया कि ऐसे मामले, भले ही शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण हों, लेकिन इन्हें PIL के जरिए आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।
याचिका में क्या की गई थी मांग
यह PIL याचिकाकर्ता राज सिंह द्वारा 28 जुलाई 2026 को दायर की गई थी। इस याचिका में केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय, लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय को निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में बदलते खतरों और साल 2001 के आतंकवादी हमले तथा 2023 की सुरक्षा चूक जैसी पिछली घटनाओं का हवाला दिया गया था। इसके साथ ही प्रशासनिक, संस्थागत, परिचालन, तकनीकी और साइबर सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता ने "Proposed Outline of the Parliament of India (Security, Sanctity and Protection) Act, 2026" नामक एक अवधारणा नोट (concept note) की जांच करने का प्रस्ताव भी दिया था।