दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, लाल किले पर INA स्मारक की मांग वाली PIL खारिज

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को लाल किले पर भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के शहीदों के लिए स्मारक बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इस याचिका के कानूनी आधार पर सवाल उठाया। इस याचिका को महान स्वतंत्रता सेनानी लाल्टी राम ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ताओं नवीन बामेल और मानव त्रिवेदी के माध्यम से दायर किया गया था। इस मामले में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को प्रतिवादी बनाया गया था।
याचिकाकर्ता ने अदालत से एक रिट याचिका के माध्यम से सरकार को स्मारक के प्रस्ताव पर कार्रवाई करने के लिए बाध्य करने का अनुरोध किया था। इसमें 2 अगस्त 2021 को लोकसभा में दिए गए एक लिखित जवाब का हवाला दिया गया था, जिसमें संस्कृति मंत्रालय ने कहा था कि उसने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती समारोह के हिस्से के रूप में इस स्मारक के लिए योजनाओं को मंजूरी दे दी थी।
अपने फैसले में अदालत ने टिप्पणी की कि पत्र सूचना कार्यालय (PIB) विज्ञप्तियों या सरकारी बयानों के माध्यम से की गई घोषणाएं स्वचालित रूप से कोई प्रवर्तनीय कानूनी अधिकार प्रदान नहीं करती हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि स्मारक का निर्माण सरकार के विवेकपूर्ण दायरे में आता है, और न्यायपालिका ऐसे प्रस्तावों के कार्यान्वयन को लागू करने के लिए परमादेश (writ of mandamus) जारी नहीं कर सकती है। परिणामस्वरूप, अदालत ने कहा कि वह इस संबंध में सरकार के नीतिगत निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।
अनुरोध को अस्वीकार करते हुए, अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित सरकारी मंत्रालय के पास एक औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत करके जाने की छूट दे दी। अदालत ने यह भी कहा कि इसके बाद सरकार के लिए इस अनुरोध पर विचार करना और प्रस्ताव के संबंध में एक तर्कसंगत आदेश जारी करना आवश्यक होगा।