दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के दावों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया। यह प्रदर्शन जुलाई 2026 में NEET परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर हुआ था, जिसमें 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर समर्थक एकत्र हुए थे और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। याचिकाकर्ता, मीडियाकर्मी नितिन नरेश ने दिल्ली पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग की औपचारिक जांच की मांग की थी। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सार्वजनिक रूप से खारिज करते हुए कहा था कि प्रदर्शन को पेशेवर तरीके से संभाला गया था (Source)।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जनहित याचिका का दायरा केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर विवादों का फैसला करने के लिए नहीं है।
अदालत ने दिल्ली पुलिस और केंद्रीय अर्धसैन्य बलों के आधिकारिक बयानों के बीच कथित टकराव के तथ्यात्मक आधार पर सवाल उठाया। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल मीडिया कवरेज ऐसी न्यायिक कार्यवाही के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस याचिका में वास्तविक जनहित का अभाव है।
इसके साथ ही 16 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर अलग से सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस ज्यादतियों की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति को फिर से गठित करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि आपत्तियां अटकलों पर आधारित थीं। इसके अतिरिक्त, सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों से जुड़ी कथित धमकियों के बाद एक 14 वर्षीय लड़की और उसके परिवार की खतरे की आशंका का आकलन करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया।