दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त आदेश: वकीलों के लंबित बिलों का तुरंत भुगतान करें और पोर्टल की तकनीकी समस्याएं दूर करें

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सरकारी वकीलों के लंबित बिलों का भुगतान जल्द करने और ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम पोर्टल की तकनीकी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है। यह आदेश 19 सितंबर 2026 को जस्टिस मिनी पुष्कर्णा द्वारा दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें पैनल काउंसिल अंजना गोसाई की याचिका भी शामिल है। सुनवाई के दौरान वकीलों ने पोर्टल पर बिल अपलोड करने में भारी दिक्कतों का सामना करने की बात कही।
पोर्टल पर आपत्तियों और बिलों के भुगतान में देरी
वकीलों ने अदालत को बताया कि बिलों पर बार-बार ऐसी आपत्तियां लगाई जाती हैं जिनका समाधान नहीं होता है। वकील ऋषिकेश कुमार ने अदालत को जानकारी दी कि उनके द्वारा जमा किए गए लगभग 500 बिलों में से करीब 250 बिलों पर आपत्ति लगाई गई थी। उन्होंने बताया कि एक आपत्ति दूर होने पर तुरंत दूसरी आपत्ति आ जाती है, जिससे भुगतान मिलने में लगातार देरी होती रहती है।
ब्रीफ ट्रांसमिशन फॉर्म और पोर्टल पर स्टेटस अपडेट
अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि जिन मामलों में वकील की पेशी अदालत के आदेश में दर्ज है, वहां तुरंत ब्रीफ ट्रांसमिशन फॉर्म जारी किए जाएं। पोर्टल पर बिल अपलोड करने के लिए इन फॉर्म्स का होना अनिवार्य है। इसके अलावा, अदालत ने आदेश दिया कि प्रत्येक वकील के सभी लंबित बिलों की वर्तमान स्थिति को पोर्टल पर स्पष्ट रूप से अपडेट किया जाए।
दिल्ली सरकार का पक्ष
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वकील तुषार सन्नू ने अदालत में दो स्टेटस रिपोर्ट पेश कीं। उन्होंने कहा कि सरकार इन शिकायतों को दूर करने के लिए उच्चतम स्तर पर नियमित बैठकें कर रही है और बिलिंग प्रक्रिया की त्रुटियों को सुधारने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।