दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: साई बाबा पर आपत्तिजनक डिजिटल कंटेंट की शिकायतों पर केंद्र सरकार करे कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह श्री साई बाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी द्वारा साई बाबा के बारे में लगातार प्रसारित हो रहे अपमानजनक और भड़काऊ डिजिटल कंटेंट को लेकर दर्ज की गई नई शिकायतों की जांच करे। यह निर्देश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने ट्रस्ट के एक नए आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया। ट्रस्ट अपनी इस याचिका के जरिए उन ऑनलाइन प्रकाशनों और YouTube वीडियो को तुरंत हटाने की मांग कर रहा है, जिनमें साई बाबा के लिए 'चांद मियां', 'जिहादी', ब्रिटिश जासूस, हत्यारे, बलात्कारी, डकैत और धर्म परिवर्तन कराने वाले जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है (Source: ANI)।
Grievance Appellate Committee (GAC) का आदेश और दलीलें
सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि Grievance Appellate Committee (GAC) पहले ही 13 अगस्त 2026 को एक आदेश जारी कर आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का निर्देश दे चुका है। GAC ने पहले चेतावनी दी थी कि इस कंटेंट में धार्मिक शत्रुता और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की क्षमता है। GAC का कहना था कि यदि इसे ऐसे ही रहने दिया गया, तो यह महामारी की तरह फैल सकता है और इसके परिणाम बेकाबू हो सकते हैं (Source: ANI)।
YouTube वीडियो और लेख अभी भी उपलब्ध
GAC के आदेश के बावजूद, ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट प्रमोद कुमार दुबे ने अदालत को सूचित किया कि सात विशिष्ट YouTube वीडियो और कई लेख अभी भी सुलभ हैं। ट्रस्ट का तर्क है कि इस सामग्री की मौजूदगी संविधान के अनुच्छेद 25 का उल्लंघन करती है, जो अनुयायियों को अपने धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने और उसका पालन करने के अधिकार का हनन करता है। 10 अगस्त और 11 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट के शुरुआती हस्तक्षेप के बाद, अदालत ने अब केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है (Source: ANI)। इस मामले की अगली सुनवाई YouTube और Google LLC जैसे प्लेटफॉर्म्स की कथित निष्क्रियता पर विचार करने के लिए 7 सितंबर 2026 को तय की गई है।