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दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा झटका: मंधके फाउंडेशन को SFIO जांच रिपोर्ट देने से इनकार, कहा- जांच प्रभावित होगी

Kittu Kumari30 July 20262 min read21 views
दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा झटका: मंधके फाउंडेशन को SFIO जांच रिपोर्ट देने से इनकार, कहा- जांच प्रभावित होगी

दिल्ली एनसीआर के पाठकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2026 को एक अहम फैसले में मंधके फाउंडेशन (Mandke Foundation) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें Serious Fraud Investigation Office (SFIO) की चल रही जांच से जुड़े Ministry of Corporate Affairs (MCA) के आदेशों को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी। इस मामले में कोर्ट के फैसले से जुड़ी हर जरूरी जानकारी नीचे दी गई है:

* जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मंधके फाउंडेशन की याचिका को खारिज किया।

* कोर्ट ने कहा कि शुरुआती स्तर पर जानकारी देने से जांच पर बुरा असर पड़ सकता है।

* फाउंडेशन 30 अक्टूबर 2025 और 12 नवंबर 2025 के MCA आदेशों की कॉपी मांगने का अधिकार साबित नहीं कर पाया।

* SFIO की इस जांच के दायरे में अनिल अंबानी ग्रुप की कंपनियां और रिलायंस होम फाइनेंस शामिल हैं।

मंधके फाउंडेशन को क्यों मिला था SFIO का नोटिस?

यह SFIO जांच मुख्य रूप से Reliance Home Finance Limited, Reliance Communications Limited और अनिल अंबानी ग्रुप की अन्य कंपनियों पर चल रही है। मुंबई में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल चलाने वाली नॉन-प्रॉफिट कंपनी (Section 8 company) मंधके फाउंडेशन को SFIO द्वारा Companies Act, 2013 की धारा 217 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इस नोटिस में फाउंडेशन से वित्तीय रिकॉर्ड (Financial records) मांगने के निर्देश दिए गए थे, क्योंकि वित्त वर्ष 2008-09 से 2025-26 के बीच जांच के दायरे में आई कंपनियों के साथ उसके सीधे या अप्रत्यक्ष वित्तीय लेनदेन (Financial transactions) रहे हैं। इस याचिका का Union government और SFIO ने कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और दस्तावेज या आदेश शेयर करना नुकसानदेह हो सकता है।

अदालत की टिप्पणी और आगे के कानूनी रास्ते

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने अपने आदेश में साफ किया कि इस मौजूदा जांच में कई कंपनियां शामिल हैं और इससे जुड़े अन्य मामले बॉम्बे हाईकोर्ट में भी पेंडिंग हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में मंधके फाउंडेशन के खिलाफ कोई भी prejudicial कार्रवाई की जाती है, तो उनके पास कानून के मुताबिक उपलब्ध कानूनी उपायों (Legal remedies) का इस्तेमाल करने की पूरी छूट होगी। आप इस मामले से जुड़ा पूरा और विस्तृत आदेश दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

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