दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में विकास गुलिया उर्फ विकास लंगारपुरिया को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने उसके पुराने आपराधिक इतिहास और फर्जी पासपोर्ट पर देश से भागने की बात को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया है। विकास लंगारपुरिया ने अपनी मां की सर्जरी के आधार पर छह हफ्ते की अंतरिम जमानत मांगी थी। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश शर्मा की खंडपीठ ने 23 सितंबर को यह राहत देने से मना कर दिया और कहा कि अपीलकर्ता के आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए कोर्ट अंतरिम सजा स्थगन के पक्ष में नहीं है।
दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, विकास लंगारपुरिया की मां की देखभाल के लिए उसकी पत्नी और बहन मौजूद हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि उस पर लगभग 19 जघन्य मामलों में एफआईआर दर्ज हैं। एक अन्य रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई कि वह पहले फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर विदेश भाग गया था, जिसके बाद उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए लुक-आउट सर्कुलर और रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए थे। उसे अबू धाबी से पकड़ा गया और भारत डिपोर्ट किया गया था।
अतिरिक्त लोक अभियोजक रितेश कुमार बह्री ने जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी एक हार्डेंड क्रिमिनल है और उसे नजफगढ़ पुलिस स्टेशन में 2015 के एक मामले में मकोका (MCOCA) के तहत भी हिरासत में लिया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद लेटेस्ट नॉमिनल रोल के मुताबिक उस पर ग्यारह एफआईआर दर्ज हैं, हालांकि कुछ मामलों में उसे जमानत मिल चुकी है या वह बरी हो चुका है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को तय की गई है।