दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: DUSIB ज़मीन पर अवैध कब्जा और अनिश्चितकालीन अवधि की मांग खारिज, तुरंत खाली करने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) द्वारा आवंटित ज़मीन पर कब्जा करने वालों की अनिश्चितकालीन विस्तार की मांग वाली अपील को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मूल समझौते में दो साल के कार्यकाल वाले फिक्स्ड-टर्म लाइसेंस को मूल समझौते में निर्धारित अधिकतम छह महीने के विस्तार से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है।
अदालत का आदेश और खाली करने की समयसीमा
अदालत ने जिन अपीलकर्ताओं को premises खाली करने का आदेश दिया है, उनमें कवात्रा हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड, कवात्रा टेंट एंड कैटरर्स प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स ईश्वरा कामधेनु रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इनको 10 अगस्त 2026 से एक हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया था, जिसके तहत अदालत ने 17 अगस्त 2026 तक ज़मीन खाली करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, अदालत ने DUSIB को 3 अगस्त 2026 से शुरू होकर छह सप्ताह के भीतर ज़मीन के लिए एक नई tender प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।
दिल्ली विधानसभा में DUSIB (संशोधन) बिल 2026 पास
संबंधित प्रशासनिक विकास के तहत, दिल्ली विधानसभा ने 12 अगस्त 2026 को DUSIB (संशोधन) बिल 2026 को मंजूरी दे दी है। यह कानून पुनर्वास के लिए पात्र झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर की पहचान करने की cut-off तारीख को 1 जनवरी 2006 से बदलकर 1 जनवरी 2025 करता है। दिल्ली के Urban Development Minister आशीष सूद ने बताया कि 2010 के DUSIB Act में इस संशोधन का उद्देश्य unrevised cut-off तारीखों से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को हल करना है, जो पहले कई परिवारों को बुनियादी अधिकारों या स्थायी आवास प्राप्त करने से बाहर करते थे।