Delhi High Court ने लाल किला ब्लास्ट मामले के आरोपी Jasir Bilal Wani की Default Bail खारिज की

Kittu Kumari18 August 20262 min read125 viewsNational
Delhi High Court ने लाल किला ब्लास्ट मामले के आरोपी Jasir Bilal Wani की Default Bail खारिज की

18 अगस्त 2026 को Delhi High Court ने 2025 के Red Fort car bomb blast case के आरोपी Jasir Bilal Wani को default bail देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह (Prathiba M Singh) और विकास महाजन (Vikas Mahajan) की खंडपीठ ने वानी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 30 मार्च 2026 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने पहले उसकी रिहाई की अर्जी को खारिज कर दिया था।

आरोपी की पृष्ठभूमि और NIA की कार्रवाई

जम्मू और कश्मीर के कुलगाम (Kulgam) स्थित गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज लेवोदारा (Government Degree College Levodara) के छात्र वानी को National Investigation Agency (NIA) ने नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया था। 10 नवंबर 2025 को हुए लाल किला कार बम हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। NIA ने मई 2026 में 10 आरोपियों के खिलाफ 7,500 पन्नों की chargesheet दाखिल की थी, जिसमें वानी को एक सक्रिय सह-साजिशकर्ता और इस terror module का "in-house engineer" बताया गया है।

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तकनीकी सहायता और हमले की साजिश

जांचकर्ताओं के अनुसार, वानी ने कथित तौर पर हमले के लिए तकनीकी सहायता प्रदान की थी, जिसमें ड्रोन में बदलाव करना और रॉकेट बनाने के प्रयास शामिल हैं। उस पर सुसाइड बॉम्बर (suicide bomber) उमर उन नबी (Umar un Nabi) के साथ मिलकर काम करने का भी आरोप है, जिसने हमले में इस्तेमाल किए गए वाहन को चलाया था। इस मॉड्यूल में नामजद अन्य व्यक्तियों में आदिल (Adil) और मुजफ्फर राथर (Muzaffar Rather) शामिल हैं।

अालत का कानूनी स्पष्टीकरण और UAPA नियम

अपने फैसले में Delhi High Court ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी द्वारा कानूनी रूप से निर्धारित अवधि के भीतर chargesheet दाखिल किए जाने के बाद कोई भी आरोपी default bail का हकदार नहीं होता है। पीठ ने नोट किया कि Code of Criminal Procedure (CrPC) की धारा 167 के संदर्भ को अब General Clauses Act की धारा 8(1) के तहत Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 187 माना जाता है। इसके अलावा, अदालत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) की धारा 43-D(2) के तहत, मानक 90-दिन की जांच अवधि को 180 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है, बशर्ते सांविधिक शर्तें पूरी हों और अदालत Public Prosecutor द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट से संतुष्ट हो।

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