दिल्ली हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शर्जील इमाम की जमानत अर्जी खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में उमर खालिद और शर्जील इमाम की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुए दंगों की कथित साजिश से जुड़ा है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की खंडपीठ ने कड़कड़डूमा अदालत के 4 जुलाई के आदेश के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया। कड़कड़डूमा कोर्ट ने पहले उनकी नियमित जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था।0
अदालत ने कहा कि दोनों अपीलें मामले में उनकी जमानत याचिकाओं पर ट्रायल कोर्ट के आदेश से उत्पन्न हुई हैं। उमर खालिद और शर्जील इमाम ने पहले गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत जमानत मांगी थी और उनकी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची थीं। शीर्ष अदालत ने इसके समक्ष सात में से पांच आरोपियों को जमानत दे दी थी, लेकिन खालिद और इमाम की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने गौर किया कि सुप्रीम कोर्ट ने खालिद और इमाम की भूमिकाओं को अन्य आरोपियों से अलग बताया था और उन्हें कथित साजिश का वैचारिक चालक करार दिया था।
खालिद की ओर से पेश वरिष्ठ वकील त्रिदीप पेइस ने तर्क दिया कि जमानत पर पुनर्विचार की मांग करने वाली परिस्थितियों में बदलाव आया है। उन्होंने दलील दी कि मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है और आरोप तय नहीं किए गए हैं और गवाहों की जांच अभी बाकी है। इमाम की ओर से पेश वकील ने भी इसी तरह तर्क दिया कि मुकदमे में बहुत कम प्रगति हुई है और उनकी जमानत याचिका पर फैसला करते समय लंबी कैद पर विचार किया जाना चाहिए। इसके विरोध में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने प्रस्तुत किया कि खालिद और इमाम को दी गई भूमिकाओं को जमानत पाने वाले अन्य आरोपियों के बराबर नहीं माना जा सकता है।
हाईकोर्ट ने माना कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों से आगे नहीं जा सकता है और न ही उनमें बदलाव कर सकता है और वह न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। खंडपीठ को यह भी सूचित किया गया कि सह-आरोपी देवांगना कलिता से जुड़ी कार्यवाही से उत्पन्न अप्रयुक्त दस्तावेजों के निरीक्षण से संबंधित एक अलग मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है। तदनुसार, खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं पाया और खालिद तथा इमाम दोनों की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल द्वारा फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे की कथित बड़ी साजिश के संबंध में दर्ज एफआईआर 59/2020 से उपजा है।