Delhi High Court: फर्जी अधिकारी बनने वाले आरोपी की जमानत खारिज, पुलिस पर उठाए सवाल

नई दिल्ली में 7 अगस्त 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने वरिष्ठ संवैधानिक और सरकारी अधिकारियों तथा पटना हाईकोर्ट के जज के रूप में फर्जीवाड़ा करके संवेदनशील और गोपनीय जानकारी हासिल करने के आरोपी मनोज कुमार झा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। मनोज कुमार झा पर धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और अधिकारियों का रूप धारण करने के आरोप हैं, जिसके तहत साल 2024 में संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी। इस मामले से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए आप Delhi High Court की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।
अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर जताई हैरानी
मामلے की सुनवाई कर रहे जस्टिस गिरीश कठपालिया ने अग्रिम जमानत याचिकाएं कई बार खारिज होने के बावजूद मनोज कुमार झा को गिरफ्तार न करने पर दिल्ली पुलिस की असफलता पर गहरी हैरानी और चिंता जताई है। इससे पहले हाईकोर्ट ने साल 2024 और 2025 में भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं और सुप्रीम कोर्ट ने भी 8 सितंबर 2025 को उनकी स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) को खारिज कर दिया था। जस्टिस कठपालिया ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि झा को मदद मिल रही है और इसके पीछे कुछ ऐसा है जो पहली नजर में दिखाई देने से ज्यादा है, साथ ही उन्होंने पुलिस की इस निष्क्रियता की आलोचना की।
आरोपी को बताया आदतन अपराधी
अदालत ने आगे यह भी नोट किया कि झा एक आदतन अपराधी प्रतीत होते हैं और उन्हें अग्रिम जमानत देने के लिए परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं पाया गया। पुलिस की इस कथित निष्क्रियता के जवाब में हाईकोर्ट ने आदेश की एक कॉपी संबंधित डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने का निर्देश दिया, जिसमें आरोपों की गंभीरता और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।