दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन गोलीबारी मामले में 20 वर्षीय आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

Kittu Kumari24 September 20262 min read0 viewsDelhi Local
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजामुद्दीन गोलीबारी मामले में 20 वर्षीय आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की

दिल्ली हाईकोर्ट ने हजरत निजामुद्दीन इलाके में हुई मारपीट और गोलीबारी की घटना के मामले में 20 वर्षीय आरोपी मोहम्मद शाहरुख की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि वीडियो फुटेज और तस्वीरों से आरोपी की सक्रिय संलिप्तता साबित होती है। न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण ने 23 सितंबर को दिए अपने आदेश में यह फैसला सुनाया। यह मामला 1 अगस्त 2025 का है, जो हजरत निजामुद्दीन थाने में भारतीय न्याय संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, बस्ती हजरत निजामुद्दीन की एक इत्र की दुकान में कुछ लोग घुसे, मारपीट की और पिस्तौल से गोलियां चलाईं, जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया।

बचाव पक्ष और पुलिस के तर्क

आरोपी के वकील ने अदालत में दलील दी कि शाहरुख का नाम मूल प्राथमिकी या शुरुआती जांच में शामिल नहीं था। वकील ने कहा कि शाहरुख एक छात्र है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसकी उम्र करीब 20 साल है। इसके विपरीत, अभियोजन पक्ष और पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध किया। पुलिस ने अदालत को बताया कि आगे की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज से शाहरुख की पहचान हुई, लेकिन वह अपने पते पर नहीं मिला और उसके परिवार ने भी उसके ठिकाने के बारे में नहीं बताया। पुलिस ने यह भी बताया कि ट्रायल कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है और उसे भगोड़ा घोषित करने की कार्रवाई भी शुरू की गई है।

अदालत का फैसला और टिप्पणियां

हाईकोर्ट के समक्ष शिकायतकर्ता के वरिष्ठ वकील द्वारा तस्वीरें और वीडियो पेश किए गए। अदालत ने पाया कि इन सामग्रियों में शाहरुख दुकान की तरफ एक बड़ा गमला फेंकते हुए नजर आ रहा है, जिससे वह केवल दर्शक नहीं बल्कि एक सक्रिय प्रतिभागी प्रतीत होता है। अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि आरोपी जांच में शामिल नहीं हुआ है और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अग्रिम जमानत एक असाधारण उपाय है। इन सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, अदालत ने मोहम्मद शाहरुख की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। मामले में अदालत ने स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत कार्यवाही तय करने के लिए हैं और गुण-दोष पर कोई प्रभाव नहीं डालेंगी।

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