दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ह्यूमन ट्रैफिकिंग और नाबालिग से शादी के आरोपी को नहीं मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट ने ह्यूमन ट्रैफिकिंग और एक नाबालिग लड़की को जबरन शादी के बंधन में बांधने के आरोपी व्यक्ति की anticipatory bail की अर्जी खारिज कर दी है। यह आदेश जस्टिस मनोज जैन द्वारा 11 अगस्त को दिया गया, जिसमें अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को बेहद गंभीर और चिंताजनक माना है।
कस्टोडियल इंटेरोगेशन की जरूरत
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि इस मामले की प्रकृति ऐसी है जिसमें law enforcement द्वारा custodial interrogation की सख्त जरूरत है। आरोपी की पहचान सुखराम के रूप में हुई है, जिस पर 17 साल की पीड़िता के यौन शोषण और उसे 30,000 रुपये में बेचने के गंभीर आरोप शामिल हैं।
पुलिस FIR और कानूनी पक्ष
बचाव पक्ष के इस दावे को अदालत ने खारिज कर दिया कि शादी कानूनी रूप से की गई थी। पुलिस ने इस मामले में kidnapping, human trafficking और sexual assault की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। अदालत का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ गंभीर अपराधों में pre-arrest bail न देने के कानूनी रुख को मजबूत करता है।