दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किले पर INA मेमोरियल की मांग वाली याचिका खारिज की

दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किले पर भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के शहीदों के लिए एक समर्पित स्मारक बनाने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्मारक बनाने और जमीन आवंटित करने का फैसला सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह याचिका महान स्वतंत्रता सेनानी लालती राम ट्रस्ट द्वारा वकीलों नवीन बामेल और मानव त्रिवेदी के माध्यम से दायर की गई थी। याचिका में केंद्र सरकार को देश की स्वतंत्रता में INA के योगदान को मान्यता देते हुए लाल किले पर स्मारक स्थापित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि वे ‘रिट ऑफ़ मैंडहमस’ (परमादेश) की मांग करने का कानूनी आधार स्पष्ट करें। पीठ ने सवाल किया कि जब स्मारक का निर्माण किसी कानूनी कर्तव्य या अधिकार से जुड़ा नहीं है, तो अदालत सरकार को जमीन आवंटित करने और स्मारक बनाने का निर्देश कैसे दे सकती है। अदालत ने कहा कि स्मारक बनाना या न बनाना ऐसा मामला नहीं है जिस पर रिट याचिका के माध्यम से आम तौर पर विचार किया जा सके।
याचिकाकर्ता ने संसद में 2021 के एक सरकारी बयान का हवाला दिया था, जिसके अनुसार लाल किले पर INA शहीदों के स्मारक का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। साथ ही, लाल किले के साथ INA मुकदमों के ऐतिहासिक जुड़ाव का भी हवाला दिया गया। हालांकि, अदालत ने माना कि पीआईबी (PIB) प्रेस विज्ञप्ति के जरिए की गई घोषणा से कोई कानूनी अधिकार पैदा नहीं होता है।
याचिका का निपटारा करते हुए, खंडपीठ ने ट्रस्ट को संबंधित केंद्रीय मंत्रालय के पास दस्तावेजों के साथ एक विस्तृत अभ्यावेदन (representation) के साथ जाने की छूट दे दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि ऐसा आवेदन दिया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार विचार करके निर्णय लेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिका का निपटारा करते समय की गई टिप्पणियों को दावों के गुण-दोष पर उसकी राय नहीं माना जाना चाहिए।