प्रॉपर्टी कन्वर्जन पर दिल्ली हाई कोर्ट का सख्त रुख, DDA को 2 महीने में आवेदन निपटाने का आदेश

दिल्ली में अपनी प्रॉपर्टी को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने का इंतजार कर रहे हजारों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को कड़ा निर्देश देते हुए कहा है कि सभी लंबित प्रॉपर्टी कन्वर्जन आवेदनों का निपटारा अगले दो महीनों के भीतर किया जाए। कोर्ट ने इस मामले में प्रशासनिक देरी पर गहरी नाराजगी जताई है।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने 28 सितंबर, 2026 को यह आदेश सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि DDA के 'इंटरएक्टिव डिस्पोजल ऑफ लैंड इंफॉर्मेशन सिस्टम' (IDLI) पोर्टल के 2 जनवरी, 2026 को काम बंद करने से पहले जितने भी आवेदन जमा किए गए थे, उन्हें उसी समय की प्रभावी पॉलिसी के आधार पर प्रोसेस किया जाए।
लाखों रुपये जमा, फिर भी काम अधूरा; कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि साल 2020 से 2026 के बीच लगभग 1,373 आवेदन लंबित हैं। हैरानी की बात यह है कि DDA इन आवेदनों के लिए करीब 155.06 करोड़ रुपये का कन्वर्जन शुल्क पहले ही वसूल चुका है, लेकिन काम अब भी अटका हुआ है। कोर्ट ने जुलाई 2026 के बाद से हुई प्रगति की कमी को "पूरी तरह से अस्वीकार्य" करार दिया।
सुनवाई के दौरान आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने नई पॉलिसी बनाने के लिए चार महीने का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत का मानना था कि जिन लोगों ने फीस जमा कर दी है, उन्हें अब और इंतजार कराना गलत है।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि प्रॉपर्टी कन्वर्जन एक वैकल्पिक सेवा है। यह सुविधा केवल उन्हीं संपत्तियों को मिलेगी जिनमें मालिकाना हक का कोई विवाद नहीं है और जिन्हें संबंधित वित्तीय संस्थान या गिरवी रखने वाले संस्थान से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त है।
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर, 2026 को होगी, जिसमें भविष्य के आवेदकों के लिए नई पॉलिसी के निर्माण की समीक्षा की जाएगी।