सामान रोकने में देरी को 'सजा' न बनाए कस्टम्स, दिल्ली हाई कोर्ट ने जताई गंभीर नाराजगी
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि कस्टम्स द्वारा सामान रोकने और फैसले में देरी करना यात्रियों के लिए सजा नहीं होना चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने कस्टम्स अधिकारियों द्वारा जब्त किए गए सामानों के मामलों में फैसले सुनाने में हो रही भारी देरी पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि केवल इसलिए कि मामले लंबित हैं और वेयरहाउस में डिमरेज चार्ज (विलंब शुल्क) बढ़ रहा है, यात्रियों को मानसिक और आर्थिक रूप से दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इसे एक गंभीर समस्या माना है, जहां सामान महीनों या सालों तक गोदामों में पड़ा रहता है और अधिकारी फैसले नहीं लेते।
यह पूरा मामला नियामत खान द्वारा आईजीआई एयरपोर्ट के कस्टम्स कमिश्नर के खिलाफ दायर एक याचिका के दौरान सामने आया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने पाया कि विभाग अक्सर यह बहाना बनाता है कि यात्री सुनवाई के लिए नहीं आए, इसलिए फैसला नहीं हो सका। लेकिन असलियत यह है कि इस बीच सामान वेयरहाउस में पड़ा रहता है और मालिक पर भारी जुर्माना बढ़ता जाता है।
अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए कहा कि इस विशेष केस में सामान जनवरी 2025 में जब्त किया गया था, लेकिन सुनवाई का नोटिस अगस्त 2025 में जारी हुआ। इसके बावजूद, नवंबर 2026 तक मामला अधर में लटका रहा। अदालत ने टिप्पणी की कि विभाग में इस तरह के मामलों को निपटाने की कोई जल्दबाजी नहीं दिखती, जबकि कई यात्री भारत के स्थायी निवासी भी नहीं होते और वे लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकते।
अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि डिमरेज चार्ज केवल आदेश आने तक ही नहीं, बल्कि रिवीजन स्टेज तक बढ़ते रह सकते हैं, जिससे यात्री पर आर्थिक बोझ बढ़ता है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में तेजी लाने के लिए एक समान प्रक्रिया और निर्देश तय किए जाने चाहिए।
शुरुआत में कोर्ट ने चीफ कमिश्नर ऑफ कस्टम्स को तलब करने का मन बनाया था, लेकिन बाद में विभाग के अनुरोध पर उन्हें तीन हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि चीफ कमिश्नर विभिन्न हवाई अड्डों और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन से डेटा इकट्ठा करें ताकि पता चल सके कि कितने मामले लंबित हैं और सामान कब से रोका गया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर, 2026 को होगी।