यात्री सामान के निपटारे में देरी पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, कस्टम्स विभाग को फटकारा
दिल्ली हाई कोर्ट ने यात्री सामान के निपटारे में कस्टम्स विभाग की सुस्ती और बढ़ते डिमरेज शुल्क पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने यात्रियों के सामान को जब्त करने के बाद उनके निपटारे (adjudication) में कस्टम्स विभाग द्वारा की जा रही भारी देरी पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि प्रशासनिक सुस्ती को यात्रियों के खिलाफ सजा के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि जब तक विभाग मामलों का फैसला नहीं करता, तब तक यात्रियों पर डिमरेज शुल्क (demurrage charges) का बोझ लगातार बढ़ता रहता है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से नुकसानदेह है।
यह पूरा मामला नियामत खान द्वारा कस्टम्स कमिश्नर, आईजीआई एयरपोर्ट और एक अन्य पक्ष के खिलाफ दायर की गई याचिका से जुड़ा है। याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता का सामान जनवरी 2025 में जब्त किया गया था। हालांकि अगस्त 2025 में उन्हें सुनवाई के लिए नोटिस दिया गया, लेकिन नवंबर 2026 तक इस मामले का कोई नतीजा नहीं निकला। कस्टम्स विभाग ने दलील दी कि याचिकाकर्ता सुनवाई के लिए नहीं आए, इसलिए प्रक्रिया रुकी रही। लेकिन जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की बेंच ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि विभाग को नवंबर 2025 से ही रिट याचिका की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने मामले को समय पर निपटाने की कोशिश नहीं की।
वेयरहाउस में महीनों पड़ा रहता है सामान, बढ़ता रहता है खर्च
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि यह कोई इकलौता मामला नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि जब्त किया गया सामान महीनों या सालों तक वेयरहाउस में पड़ा रहता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब तक विभाग अपना अंतिम आदेश (Order-in-Original) पारित नहीं करता, तब तक डिमरेज शुल्क बढ़ता रहता है और अगर विभाग मामले को आगे चुनौती देता है, तो यह खर्च और भी बढ़ जाता है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, हाई कोर्ट ने कस्टम्स विभाग के पैनल काउंसिल को एक ऐसी तय प्रक्रिया बनाने में मदद करने का निर्देश दिया है जिससे मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। कोर्ट ने विभाग को तीन हफ्ते के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है। साथ ही, चीफ कमिश्नर ऑफ कस्टम्स को निर्देश दिया गया है कि वे हवाई अड्डों और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन से लंबित मामलों का डेटा इकट्ठा करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी।