रोशनारा मकबरे के पास अवैध निर्माण पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, ASI, MCD और पुलिस को फटकारा

दिल्ली हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सरकारी एजेंसियों की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर दिल्ली स्थित रोशनारा बेगम के मकबरे के पास हो रहे अवैध निर्माण को रोकने में नाकाम रहने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), दिल्ली नगर निगम (MCD) और दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने इन एजेंसियों के रवैये को 'बेपरवाह' बताते हुए कहा कि विरासत के संरक्षण के प्रति उनमें संवेदनशीलता की भारी कमी है।
यह पूरा मामला मनीष ग्रोवर द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है, जिसमें शक्ति नगर के सिंह साहब रोड पर हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत की गई थी। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि सरकारी तंत्र की मिलीभगत या लापरवाही की वजह से एक निजी व्यक्ति को संरक्षित स्मारक के पास अवैध निर्माण पूरा करने का मौका मिल गया।
अधिकारियों से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
कोर्ट ने इस मामले में जवाबदेही तय करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। MCD कमिश्नर, दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर और ASI के डायरेक्टर को व्यक्तिगत हलफनामा (Affidavit) दाखिल करने का आदेश दिया गया है। अदालत चाहती है कि इन अधिकारियों द्वारा उन विशिष्ट कर्मचारियों की पहचान की जाए, जिनकी लापरवाही की वजह से कानूनी प्रतिबंधों और अदालती आदेशों के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा।
अदालत ने प्रशासनिक विफलताओं का एक लंबा सिलसिला उजागर किया है। रिकॉर्ड के मुताबिक, 15 फरवरी 2024 को ASI ने काम रोकने का नोटिस दिया था और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। 10 अप्रैल 2024 को ASI ने औपचारिक रूप से MCD और उत्तर-पश्चिम जिले के डीसीपी से अवैध काम रुकवाने का अनुरोध किया था। इसके बावजूद, MCD ने मार्च 2025 तक कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया।
हैरानी की बात यह है कि 9 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश में स्थानीय एसएचओ (SHO) को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि निर्माण कार्य न हो, लेकिन इस आदेश को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन तीनों एजेंसियों की संयुक्त निष्क्रियता के कारण रोशनारा बाग स्थित मकबरे और बारादरी की सुरक्षा और गरिमा के साथ खिलवाड़ हुआ है।