कनॉट प्लेस में विरोध प्रदर्शन की तैयारी, दिल्ली हाई कोर्ट में पुलिस ने दिया कानूनी कार्रवाई का भरोसा

दिल्ली के दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस (CP) में होने वाले एक प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में बड़ी हलचल हुई है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा शुक्रवार को सेंट्रल पार्क में किए जाने वाले प्रदर्शन के खिलाफ एक स्ट्रीट वेंडर ने याचिका दायर की थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि कानून के दायरे में रहकर इस स्थिति को संभालने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे ताकि आम जनजीवन और व्यापार प्रभावित न हो।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पालिका बाजार के एक लाइसेंस प्राप्त स्ट्रीट वेंडर अनिल कुमार गुप्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। याचिकाकर्ता के वकील सच्चिन पुरी ने दलील दी कि सेंट्रल पार्क विरोध प्रदर्शन के लिए कोई निर्धारित जगह नहीं है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि यदि इस तरह के अवैध प्रदर्शन होते रहे, तो इलाके के व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों का भारी नुकसान होगा। वकील ने यह भी कहा कि पिछला वीकेंड पहले ही नुकसान में बीता है और अगर इस बार भी ऐसा हुआ, तो व्यापारियों की कमर टूट जाएगी।
व्यापारियों के नुकसान और अराजकता का डर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर गौर किया कि याचिकाकर्ता को अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह क्यों है। इस पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि कुछ लोगों को डर है कि पहले की तरह फिर से अराजकता और कानूनविहीनता की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली के करीब 15 लाख व्यापारी इस तरह की गतिविधियों से प्रभावित होते हैं। शर्मा ने स्पष्ट किया कि अगर कोई दिल्ली की नब्ज दबाकर अराजकता फैलाने की कोशिश करेगा, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
अदालत ने याचिका में नामजद CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके की गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। कोर्ट को बताया गया कि डिपके को ईमेल के जरिए नोटिस भेज दिया गया है। पुलिस और प्रशासन ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वे डिपके और उनके सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और उन्हें नियंत्रित करने के लिए उचित कदम उठाए गए हैं।
एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने पुलिस के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर ले लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी, जिसमें कोर्ट आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा।