ओपन जेल सुधारों में लापरवाही: दिल्ली हाई कोर्ट ने DG Prisons को थमाया अवमानना नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने ओपन जेल सुधारों में देरी और लापरवाही पर DG Prisons को अवमानना नोटिस जारी किया है। पूरी खबर यहाँ पढ़ें।

Kittu Kumari28 October 20262 min read0 viewsDelhi Local
ओपन जेल सुधारों में लापरवाही: दिल्ली हाई कोर्ट ने DG Prisons को थमाया अवमानना नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने जेल सुधारों को लेकर प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूशंस (खुली जेलों) के विस्तार और उन्हें मजबूत करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू न करने पर महानिदेशक (जेल) यानी DG Prisons को औपचारिक अवमानना नोटिस जारी किया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने इस मामले में हुई बेहद धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जताई है।

अदालत ने सख्त शब्दों में कहा कि फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद से यह मामला "एक इंच भी आगे" नहीं बढ़ा है। कोर्ट ने प्रशासनिक प्रतिक्रिया को "पूरी तरह से लापरवाह और असंवेदनशील" करार दिया। इस दौरान कोर्ट इस बात पर भी भड़का कि महानिदेशक के बजाय एक जूनियर जेल अधिकारी द्वारा अनुपालन हलफनामा (compliance affidavit) दाखिल किया गया, जिसे न्यायिक आदेशों की "पूर्ण अवहेलना" माना गया।

नियमों में बदलाव और अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल

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सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल (क्रिमिनल) संजय लाओ के बयानों पर भी कोर्ट ने सवाल उठाए। उन्होंने जेल अधिकारियों के निर्देश पर दावा किया था कि मौजूदा नियमों में किसी बदलाव या संशोधन की जरूरत नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके विपरीत निर्देश दिए थे।

कोर्ट ने दिल्ली के मुख्य सचिव को भी चेतावनी दी कि उन्हें भी अवमानना का सामना करना पड़ सकता है, हालांकि स्पेशल सचिव (होम) के आश्वासनों के बाद इस फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है। स्पेशल सचिव ने दो सप्ताह के भीतर पैराग्राफ-वार अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का अनुरोध किया है और भरोसा दिलाया है कि भविष्य की निगरानी समिति की बैठकों में वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन समितियों की अध्यक्षता राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष द्वारा की जानी चाहिए और इसमें सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी शामिल नहीं होने चाहिए। लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक, दिल्ली में राज्य निगरानी समिति की केवल एक बैठक हुई है, और उसमें भी नियमों के खिलाफ एक जूनियर अधिकारी को भेजा गया था।

अब महानिदेशक (जेल) को 18 नवंबर, 2026 तक इस अवमानना नोटिस पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 नवंबर, 2026 को तय की गई है, जबकि 30 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक निगरानी समिति की बैठक होनी है।

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