CJP से 50 करोड़ मुआवजे की मांग, दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भेजा सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली हाई कोर्ट ने Cockroach Janta Party से 50 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दिलचस्प मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट के सामने एक ऐसी जनहित याचिका (PIL) आई थी, जिसमें Cockroach Janta Party (CJP) को दिल्लीवासियों को हुई परेशानी के बदले 50 करोड़ रुपये का अंतरिम मुआवजा जमा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी है कि वे इस राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।
दरअसल, एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि इस तरह के समान मुद्दों पर पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने माना कि जब देश की सबसे बड़ी अदालत इस तरह के मामलों को देख रही है, तो न्यायिक अनुशासन (Judicial Discipline) के नाते हाई कोर्ट को ऐसे आदेश नहीं देने चाहिए जो सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत हों।
विरोध प्रदर्शनों से बढ़ी परेशानी का लगाया आरोप
यह याचिका वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली के आम नागरिकों, व्यापारियों, ऑफिस जाने वालों और स्कूली बच्चों को भारी असुविधा और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि:
- पार्टी को 50 करोड़ रुपये का अंतरिम मुआवजा जमा करना चाहिए।
- एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति (High-powered committee) बनाई जाए, जो प्रभावित नागरिकों के दावों का आकलन कर मुआवजे का निर्धारण करे।
- प्रशासन ऐसी कार्यवाही शुरू करे जिससे प्रभावित लोगों को राहत कोष के जरिए मदद मिल सके।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में कोर्ट को खुद को पीछे हटा लेना चाहिए ताकि कोई विरोधाभासी आदेश न आए। इसी के साथ कोर्ट ने इस याचिका को निस्तारित कर दिया और याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्देश दिया।